ग्रामीण भारत में स्थानीय शासन को मजबूत करने, पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्मिकों को नई व्यवस्थाओं से परिचित कराने तथा ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में देशभर में आयोजित किए जा रहे पंच सम्मेलनों को उल्लेखनीय सफलता मिली है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-जी राम जी) अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके प्रावधानों की व्यापक जानकारी पंचायत स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 1,338 पंच सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं।
इन सम्मेलनों में पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यापक भागीदारी हुई है। अब तक करीब 5.26 लाख से अधिक पंचायती राज पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्मिक इन सम्मेलनों में शामिल हो चुके हैं।
यह व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि ग्रामीण स्थानीय शासन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच अधिनियम, ग्राम पंचायतों की भूमिका और सहभागी योजना निर्माण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास के केंद्र में रखने का प्रयास
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका देने पर जोर दिया गया है। पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि गांव की स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझते हैं।
ऐसे में ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।
इसी उद्देश्य से ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के लिए पंच सम्मेलन आयोजित करने का अनुरोध किया था।
इन सम्मेलनों के माध्यम से प्रतिनिधियों को अधिनियम के प्रावधानों, उनकी भूमिका, जिम्मेदारियों और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
1,338 पंच सम्मेलन बने जागरूकता का बड़ा मंच
देशभर में अब तक 1,338 पंच सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। यह संख्या अभियान के व्यापक स्तर को दर्शाती है।
पंच सम्मेलन केवल औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के अभिमुखीकरण के मंच के रूप में विकसित किया गया है।
इन सम्मेलनों में स्थानीय शासन, ग्रामीण रोजगार, आजीविका, योजना निर्माण, परिसंपत्ति निर्माण, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर प्रतिनिधियों को जानकारी दी जा रही है।
इससे पंचायत स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों और कार्मिकों को नई व्यवस्थाओं को समझने तथा उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में सहायता मिल सकती है।
5.26 लाख से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
पंच सम्मेलन अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक इसकी व्यापक भागीदारी है। अब तक करीब 5.26 लाख पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों/कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि पंचायती राज संस्थाओं के स्तर पर ग्रामीण विकास से संबंधित नई व्यवस्थाओं को लेकर रुचि बढ़ रही है।
स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन गांवों में होता है। पंचायत प्रतिनिधियों को यदि योजना के उद्देश्य, प्रक्रिया और जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी होगी तो वे अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार बेहतर भागीदारी कर सकते हैं।
23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पूरा किया अभियान
अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने निर्धारित पंच सम्मेलन पूरे कर लिए हैं।
इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव, जम्मू एवं कश्मीर तथा पुडुचेरी शामिल हैं।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने निर्धारित सम्मेलनों को समयबद्ध तरीके से पूरा करके अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय तथा पंचायत स्तर तक सूचना पहुंचाने को महत्व दिया जा रहा है।
गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल ने अपनाया बहु-स्तरीय मॉडल
कई राज्यों ने पंच सम्मेलन को अधिक व्यापक बनाने के लिए नवाचारपूर्ण और बहु-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया है।
गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने जिला स्तर के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक स्तरों पर भी सम्मेलन आयोजित किए हैं।
इससे अधिक संख्या में पंचायती राज पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच बनाने में मदद मिली है।
बहु-स्तरीय सम्मेलन का लाभ यह है कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की विशिष्ट परिस्थितियों के संदर्भ में योजना और अधिनियम की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
सहभागी योजना निर्माण पर विशेष जोर
ग्रामीण विकास की योजनाओं की सफलता के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। गांव की जरूरतें प्रत्येक क्षेत्र में अलग हो सकती हैं। कहीं सिंचाई और जल संरक्षण प्राथमिकता हो सकती है, तो कहीं सड़क, रोजगार, आवास, आजीविका या प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता अधिक हो सकती है।
ऐसे में सहभागी योजना निर्माण के माध्यम से स्थानीय प्राथमिकताओं को विकास योजनाओं में शामिल करने का अवसर मिलता है।
पंच सम्मेलनों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास योजनाओं की योजना बनाने और उनके क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विकसित ग्राम पंचायत योजना यानी VGPP की जानकारी
पंच सम्मेलनों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) से संबंधित प्रावधानों की जानकारी भी दी जा रही है।
ग्राम पंचायतों के लिए विकास योजना तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
VGPP से संबंधित जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझने में मदद कर सकती है कि गांव के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्राथमिकताएं कैसे तय की जाएं और विभिन्न विकास गतिविधियों को किस प्रकार एकीकृत किया जाए।
इससे पंचायत स्तर पर योजनाओं के निर्माण में अधिक व्यवस्थित और सहभागी दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड से जुड़ी जानकारी
पंच सम्मेलन अभियान का एक महत्वपूर्ण विषय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड भी है।
ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी स्थानीय प्रतिनिधियों और कार्मिकों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि पात्र ग्रामीण परिवार योजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को समझ सकें।
पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण स्तर पर लोगों और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। इसलिए उन्हें रोजगार संबंधी प्रावधानों और प्रक्रियाओं की जानकारी होना ग्रामीण परिवारों तक सही सूचना पहुंचाने में सहायक हो सकता है।
परिसंपत्ति निर्माण को ग्रामीण विकास से जोड़ने का प्रयास
ग्रामीण रोजगार और विकास कार्यक्रमों के तहत होने वाले कार्य केवल तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित न रहें, बल्कि गांव में उपयोगी और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण में भी योगदान दें—यह ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
पंच सम्मेलनों में परिसंपत्ति निर्माण से संबंधित पहलुओं पर भी जानकारी दी जा रही है।
गांव में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अन्य स्थानीय जरूरतों से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
ऐसी परिसंपत्तियां यदि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जाती हैं और उनका उचित रखरखाव किया जाता है तो लंबे समय तक ग्रामीण समुदाय को लाभ पहुंचा सकती हैं।
अभिसरण से बढ़ेगी योजनाओं की प्रभावशीलता
ग्रामीण विकास में कई योजनाएं अलग-अलग विभागों और संस्थाओं के माध्यम से संचालित होती हैं। इन योजनाओं के बीच अभिसरण (Convergence) से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
पंच सम्मेलन प्रतिनिधियों को अभिसरण की अवधारणा और इसके महत्व से भी परिचित कराने का मंच बन रहे हैं।
यदि पंचायत स्तर पर विभिन्न योजनाओं की आवश्यकताओं और संसाधनों का बेहतर समन्वय किया जाता है, तो एक ही गांव में अलग-अलग योजनाओं के बीच तालमेल बनाकर अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सामाजिक अंकेक्षण से पारदर्शिता को बढ़ावा
पंच सम्मेलनों में सामाजिक अंकेक्षण और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधानों को भी प्रमुखता दी जा रही है।
ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से समुदाय को विकास कार्यों और उनके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं की जानकारी प्राप्त करने तथा निगरानी में भाग लेने का अवसर मिलता है।
स्थानीय स्तर पर जनता की भागीदारी बढ़ने से योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है।
शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी भी महत्वपूर्ण
किसी भी सरकारी कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिकायतों का समयबद्ध समाधान आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंच सम्मेलनों में शिकायत निवारण व्यवस्था से संबंधित जानकारी भी साझा की जा रही है।
पंचायत प्रतिनिधियों और कार्मिकों को शिकायत दर्ज करने, संबंधित प्रक्रिया और समाधान व्यवस्था की जानकारी होने से ग्रामीण नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित मंच तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
यह व्यवस्था ग्रामीण स्तर पर सुशासन और प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका होगी और महत्वपूर्ण
भारत में पंचायती राज व्यवस्था स्थानीय लोकतंत्र की आधारभूत संरचना है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला पंचायत के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाता है।
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के संदर्भ में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
योजना निर्माण, क्रियान्वयन, निगरानी और सामाजिक उत्तरदायित्व से संबंधित जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत कर्मचारियों का सक्षम होना आवश्यक है।
पंच सम्मेलन इसी क्षमता निर्माण और अभिमुखीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में सामने आए हैं।
डिजिटल और तकनीक आधारित शासन की ओर बढ़ते कदम
ग्रामीण विकास में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग लगातार महत्वपूर्ण हो रहा है। योजनाओं से जुड़े डेटा, कार्यों की निगरानी और रिपोर्टिंग में डिजिटल माध्यमों के उपयोग से प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
हालांकि उपलब्ध PIB सामग्री में पंच सम्मेलनों के अंतर्गत किसी विशिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म या तकनीकी प्रणाली का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भूमिका को प्रमुखता दी गई है।
जनभागीदारी से मजबूत होगा स्थानीय शासन
किसी भी ग्रामीण विकास कार्यक्रम की सफलता के लिए सरकारी तंत्र के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
पंच सम्मेलन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीण विकास से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराते हैं। ऐसे मंचों पर स्थानीय समस्याओं, योजनाओं की प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर संवाद की संभावना बढ़ती है।
5.26 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी इस अभियान के व्यापक जनसंपर्क और अभिमुखीकरण प्रभाव को दर्शाती है।
गांव के स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायत स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होंगी।
जब प्रतिनिधियों और कार्मिकों को यह जानकारी होती है कि उनकी भूमिका क्या है, किस प्रक्रिया का पालन किया जाना है और योजनाओं के परिणामों की निगरानी कैसे होगी, तो स्थानीय स्तर पर जवाबदेही मजबूत की जा सकती है।
पंच सम्मेलनों के माध्यम से इसी प्रकार की स्पष्टता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में पहल
ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका का मुद्दा सीधे परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक है।
विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों को पंचायत स्तर पर बेहतर तरीके से समझाने से स्थानीय प्रतिनिधियों को रोजगार और आजीविका संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी भूमिका निभाने में मदद मिल सकती है।
इससे ग्रामीण विकास को केवल रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय व्यापक आजीविका सुदृढ़ीकरण के दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिल सकता है।
राज्यों की सक्रिय भागीदारी बनी अभियान की ताकत
पंच सम्मेलन अभियान की प्रगति में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।
23 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने निर्धारित सम्मेलन पूरे करना इस बात का संकेत है कि राज्यों ने अभियान को गंभीरता से लिया है।
विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए अलग-अलग मॉडल यह भी दर्शाते हैं कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अभियान के स्वरूप में बदलाव किया जा सकता है।
गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर और पश्चिम बंगाल में जिला स्तर से आगे अन्य प्रशासनिक स्तरों पर सम्मेलन आयोजित करना इसका उदाहरण है।
आगे की राह: जागरूकता से क्रियान्वयन तक
अब अभियान के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि सम्मेलनों से प्राप्त जानकारी को वास्तविक क्रियान्वयन में बदला जाए।
किसी भी कानून या योजना के बारे में जागरूकता पहला कदम है। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों और कार्मिकों द्वारा उसके प्रावधानों को सही तरीके से लागू करना, स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाना, पारदर्शिता बनाए रखना, सामाजिक अंकेक्षण को प्रभावी बनाना और शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
यदि पंचायत स्तर पर इन व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो ग्रामीण विकास योजनाओं की पहुंच और प्रभाव दोनों को मजबूत किया जा सकता है।
देशभर में आयोजित 1,338 पंच सम्मेलनों और उनमें 5.26 लाख से अधिक पंचायती राज पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा कार्मिकों की सहभागिता ग्रामीण स्तर पर विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
23 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने निर्धारित सम्मेलन पूरे किए जाना राज्यों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने जिला स्तर के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक स्तरों पर भी सम्मेलन आयोजित कर अभियान को और व्यापक बनाया है।
इन सम्मेलनों के माध्यम से ग्राम पंचायतों की भूमिका, सहभागी योजना निर्माण, विकसित ग्राम पंचायत योजना, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड, परिसंपत्ति निर्माण, अभिसरण, सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत निवारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिनिधियों और कार्मिकों को जानकारी दी जा रही है।
वास्तविक सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि यह जागरूकता गांवों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कितनी बदलती है। यदि पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की पहचान और योजना निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, विकास कार्यों की पारदर्शी निगरानी होती है और ग्रामीण नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है, तो स्थानीय शासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ग्रामीण भारत की भूमिका निर्णायक है। गांवों में रोजगार, आजीविका, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सक्षम और जवाबदेह पंचायत व्यवस्था जरूरी है। इस दृष्टि से पंच सम्मेलन केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं को अधिक सक्षम, सहभागी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखे जा सकते हैं।
