भारत और मॉरिशस के बीच कृषि विज्ञान, अनुसंधान तथा कौशल विकास के सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मॉरिशस के 25 मिड-कैरियर सिविल सर्वेंट्स के प्रतिनिधिमंडल ने आज ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI), नई दिल्ली का दौरा किया। यह प्रतिनिधिमंडल Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम के तहत भारत आया है।
प्रतिनिधिमंडल को IARI के वैज्ञानिकों ने भारत के कृषि अनुसंधान ढांचे, नवाचारों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तृत जानकारी दी। दौरे की शुरुआत संस्थान की उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाओं और फसल सुधार इकाइयों के अवलोकन से हुई, जहां वैज्ञानिकों ने उच्च उत्पादकता वाली किस्मों, बीज प्रौद्योगिकी, फसली जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों में भारत की उपलब्धियों को साझा किया।
IARI के विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे भारत आधुनिक कृषि उपकरणों, डिजिटलीकरण, फसल रोग प्रबंधन और प्रिसिजन फार्मिंग की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रुचि दाखिल करते हुए पूछा कि ये तकनीकें छोटे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में कैसे सहायक हो सकती हैं।
दौरे के दौरान मॉरिशस के अधिकारियों को IARI के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्रह, अत्याधुनिक फेनोटाइपिंग प्लैटफॉर्म, और हाल ही में स्थापित “Crop Accelerator” सहित कई अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का प्रदर्शन किया गया। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि भारत अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों के साथ कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में पहले से सहयोग कर रहा है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है।
प्रतिनिधिमंडल ने ICAR की छात्रवृत्ति योजनाओं, कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उभरती तकनीकों के संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा, बीज गुणवत्ता सुधार, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और कृषि-जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
प्रतिनिधियों ने IARI की उपलब्धियों और भारत की कृषि अनुसंधान क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यह दौरा उनके लिए सीखने और समझ बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत-मॉरिशस साझेदारी कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने में दीर्घकालिक लाभ पहुंचाएगी।
यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत कृषि राजनयिक संबंधों और ज्ञान-विनिमय की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

