केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ अपने 35 वर्षों के अनुभवों को पुस्तक ‘अपनापन’ के रूप में शब्द दिए हैं। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री चौहान ने इस पुस्तक की घोषणा करते हुए कहा कि यह केवल संस्मरण नहीं, बल्कि संगठन, सुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रसमर्पण की जीवंत यात्रा का दस्तावेज है।
पुस्तक का लोकार्पण 26 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में किया जाएगा। इस अवसर पर भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति M. Venkaiah Naidu और पूर्व प्रधानमंत्री H. D. Deve Gowda मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिताए गए उन वर्षों की कहानी है, जिसमें संगठनात्मक जीवन, जनसेवा, चुनावी रणनीति, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के अनेक अनुभव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 1991 की एकता यात्रा से शुरू हुआ यह संबंध समय के साथ और गहरा होता गया। एक कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई यह यात्रा मुख्यमंत्री और फिर केंद्रीय मंत्री के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियों तक पहुंची।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया प्रधानमंत्री मोदी को एक निर्णायक और प्रभावशाली नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक कर्मयोगी, साधक और राष्ट्रहित के लिए पूर्णतः समर्पित व्यक्ति के रूप में बहुत करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देर रात तक काम करने के बावजूद अगले दिन उसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ देशहित में जुटे दिखाई देते हैं।
श्री चौहान ने पुस्तक में वर्णित एकता यात्रा के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बहुत से लोग इसे केवल राजनीतिक यात्रा मानते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने उसे राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रगौरव के अभियान में बदल दिया। लाल चौक पर तिरंगा फहराने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी जी की दृष्टि केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि युवाओं के भीतर राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना जागृत करना उनका उद्देश्य था।
उन्होंने कहा कि उसी दौर में उन्होंने महसूस किया कि नेतृत्व केवल भाषणों या पद से नहीं बनता, बल्कि अनुशासन, तपस्या, सेवा-भाव और कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता से निर्मित होता है। यही अनुभव आगे चलकर ‘अपनापन’ पुस्तक की प्रेरणा बने।
पुस्तक में प्रधानमंत्री मोदी की संगठन क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के कई प्रसंगों का उल्लेख किया गया है। श्री चौहान ने कहा कि संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने की क्षमता प्रधानमंत्री मोदी की विशेष पहचान रही है। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने यह भी देखा कि कैसे वर्षों से लंबित और जटिल मुद्दों का समाधान संवाद, स्पष्ट सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति से संभव हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तित्व जितना मजबूत और निर्णायक है, उतना ही संवेदनशील भी है। श्री चौहान ने एक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि एकता यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ समर्पित कार्यकर्ता लाल चौक तक नहीं पहुंच सके थे। उस समय मोदी जी ने जिस आत्मीयता से उनकी भावनाओं को समझा, वह उनके कार्यकर्ताओं के प्रति गहरे लगाव और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अक्सर लोग नेतृत्व को केवल कठोर निर्णयों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के भीतर गरीबों, किसानों, महिलाओं और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के प्रति गहरी संवेदनशीलता है। यही संवेदना उनके नेतृत्व को व्यापक और विशिष्ट बनाती है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक की ताकत को बहुत पहले पहचान लिया था, जब राजनीति और प्रशासन में डिजिटल माध्यमों को लेकर गंभीर सोच विकसित नहीं हुई थी। बाद में देश ने देखा कि कैसे तकनीक को सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी का प्रभावी माध्यम बनाया गया।
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में भय और अनिश्चितता का माहौल था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य, दूरदृष्टि और मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया। उनके निर्णयों ने देश को दिशा और विश्वास दोनों दिए।
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि ‘अपनापन’ केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक विचार, कार्यशैली और राष्ट्र निर्माण की उस भावना का दस्तावेज है जिसने नए भारत की दिशा तय की। इस पुस्तक में संगठन से सरकार तक, संवेदना से निर्णय तक और संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा को निकटता से समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उनके अनुसार, यह संदेश देती है कि देश बदलने के लिए बड़े पद की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प, अनुशासन और सेवा-भाव की आवश्यकता होती है।
श्री चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ के माध्यम से वे अपने कुछ निजी अनुभव समाज के सामने रख रहे हैं, ताकि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और नेतृत्व को और अधिक आत्मीयता से समझ सकें। साथ ही यह पुस्तक उन पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी होगी जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की प्रक्रिया को करीब से जानना चाहते हैं।

