֍:क्या होगें खाद के भाव?§ֆ:खरीफ सीजन के लिए लगभग 37,216.15 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जो कि पिछले सीजन से 13000 रुपये अधिक है. किसानों को सब्सिडी वाले, किफायती और उचित मूल्य पर उर्वरको की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा, उर्वरकों और इनपुट्स, यानी यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हाल के रुझानों को देखते हुए, सरकार ने एनपीकेएस ग्रेड सहित फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों पर 01.04.25 से 30.09.25 तक प्रभावी खरीफ 2025 के लिए एनबीएस दरों को मंजूरी देने का फैसला किया है.§֍:किसानों को होगा लाभ§ֆ:उन्होंने आगे कहा, सब्सिडी का फैसला बहुत बड़ा है और इससे करोड़ों किसानों को फायदा मिलेगा. एनबीएस सब्सिडी के अंतर्गत पीएंडके उर्वरकों के 28 ग्रेड को कवर किया जाता है. इन उर्वरकों की कीमतें सस्ती दरों पर खाद निर्माता कंपनियों और आयातकों द्वारा तय की जाती हैं. खरीफ 2025 में 180 लाख मीट्रिक टन पीएंडके उर्वरकों की जरूरत होगी जिसके लिए सरकार ने 37,216 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी है.§केंद्रीय मंत्रीमंडल ने देश में पीएंडके उर्वरकों पर सस्ती, रियायती और उचित दरें तय करने के लिए खरीद सीजन 2025-26 के लिए 37,216 करेड़ रुपये की एनबीएस सब्सिडी को मंजूरी दी है. इसको लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा सुनिश्चित किया है कि किसानों पर बोझ न पड़े. डीएपी की कीमत 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग पर बनी रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 37,216.15 करोड़ रुपये की एनबीएस सब्सिडी को मंजूरी दी है. इससे करोड़ों किसानों को लाभ होगा…” उन्होंने आगे कहा, कोविड के बाद खादों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के ऊपर इसका बोझ नहीं आने दिया. डीएपी का दाम 1350 रुपये प्रति 50 किलो बोरी रहे, इसके लिए इसके लिए भारत सरकार 37,216 करोड़ रुपये की सब्सिडी का भार सहन करेगी, लेकिन किसानों के ऊपर बोझ नहीं आने देगी.

