भारत के खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Jitendra Singh ने Indian Institute of Astrophysics (आईआईए) में 75 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली अत्याधुनिक नई अतिरिक्त इमारत की आधारशिला रखी।
यह सात मंज़िला भवन करीब एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसे देश के प्रमुख वैज्ञानिक केंद्रों में से एक के रूप में तैयार किया जाएगा।
विश्वस्तरीय शोध और तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना को “भविष्य के लिए तैयार” खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के विकास की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस नई सुविधा से उन्नत अनुसंधान, आधुनिक प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास को नई गति मिलेगी।
आईआईए में विकसित स्वदेशी तकनीकों का उपयोग Indian Space Research Organisation सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों में हो रहा है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
ऐतिहासिक विरासत से आधुनिक विज्ञान तक
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईए की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान मद्रास वेधशाला से शुरू होकर तीन शताब्दियों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि कोडाइकनाल, कवलूर, गौरीबिदनूर और हानले स्थित वेधशालाएं सौर और रात्रि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
बजट 2026 में चार बड़े टेलीस्कोप प्रोजेक्ट
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026 में चार विश्वस्तरीय दूरबीन परियोजनाओं की घोषणा की गई है, जिनका विकास आईआईए द्वारा किया जाएगा:
- नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप
- नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप
- हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप का उन्नयन
- कॉसमॉस-2 तारामंडल
इन परियोजनाओं से भारत की खगोलीय अनुसंधान क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
युवाओं और रिसर्च इकोसिस्टम पर फोकस
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बढ़ती वैज्ञानिक रुचि को देखते हुए संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को जोड़ना होगा।
उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बढ़ाई गई बजटीय सहायता, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और नई पहल जैसे आरडीआई फंड और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन का भी उल्लेख किया।
‘एम.के.वी. बप्पू भवन’ होगा नाम
इस नई इमारत का नाम संस्थान के संस्थापक निदेशक प्रो. मनाली कल्लत वेणु बापू के सम्मान में “एम.के.वी. बप्पू भवन” रखने का प्रस्ताव है। इसमें आधुनिक प्रयोगशालाएं, कक्षाएं, कार्यालय और कॉन्फ्रेंस सुविधाएं होंगी।
परियोजना को Central Public Works Department द्वारा लगभग दो वर्षों में पूरा किया जाएगा।
आईआईए में बनने वाला यह नया भवन भारत के वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल भविष्य की वैज्ञानिक खोजों और नवाचार के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
