֍:इंजीनियर से एंटरप्रेन्योर बनने तक के सफर के बारे में बताइये?§ֆ:मैं एक छोटे और अनपड़ परिवार से आता हूं। उत्तर प्रदेश के शामली में हमारा परिवार रहता है। शामली से सटे झिंझाना गांव में आज मैं गुड की एक फैक्ट्री चला रहा हूं। दरअसल, झिंझाना में शुरु से ही गन्ना, गुड़, चीनी, आदि का उत्पादन होता आया है। बड़े होते-होते परिवार की मदद से पढ़ाई पूरी कर इंजीनियरिंग की और उसके बाद नौकरी ढूंढनेनिकल गया। उस दौरान काफी आश्चर्यजनक रहा। मैंने सोचा कि सुगर फैक्ट्री में जाकर नौकरी करुंगा। दौराला हमारे इलाके की सबसे अच्छी फैक्ट्री हुआ करती थी। मैंने उसी फैक्ट्री में जब आवेदन किया तो मुझे निकाल दिया गया, क्योंकि उस जमाने में अंग्रेजी अधिकतर लोगों को नहीं आती थी। उसके बाद में मुझे केल्वीनेटर फरीदाबाद से ऑफर मिल गया। उसके बाद मैंने कई कंपनियों में नौकरी की जिसमें कोऑपरेटिव सेक्टर, चीनी मील लगाने के कार्य जैसे कई कार्य किए। लेकिन मैंने विदेश यात्रा के दौरान जब चीनी बनाने की स्वचालित मशीनें देखी। तभी मैंने एक साथी के साथ मिलकर फैक्ट्री की डिजाइनिंग की, जिसमें बॉइलर, भट्टी, आग जैसा कोई प्रदूषित तत्व नहीं शामिल था। बता दें कि गुड़ की ऐसी दुनिया में केवल दो ही फैक्ट्री हैं एक आसम में और एक शामली में। पहली फैक्ट्री भी हमने ही लगाई थी और फिर दूसरी भी हमने ही लगाई। ये सफर हमने गुड़ की मिलावट को कम करने के लिए किया था। इंडस्ट्री में विकास करने के लिए हमने ये कदम उठाया। मुझे बड़ा गर्व महसूस होता है जब मेरी फैक्ट्री में देश-विदेश से लोग आते हैं। §֍:किसानों को बाकी चीनी मीलें छोड़कर आपके यहां गन्ना बिक्री करने से क्या लाभ मिलता है?§ֆ:मेरा सपना शुरु से ही अपने गांव का सुधार और किसानों की परेशानियों को दूर करना रहा है। मैं खुद किसान परिवार से आता हूं। मैंने किसानों को करीब से देखा है। वे गन्ने को लेकर मीलों में चले तो जाते हैं, लेकिन उन्हें समय पर पैसा नहीं मिलता। इसी कारण वे कर्ज के तले दब जाते हैं और नुकसान उठाते हैं। हमारे गुड़ कारखाने में किसानों को किसी प्रकार की रुकावट नहीं झेलनी पड़ती है। वे सीधा अपनी फसल हमारे यहां लाते हैं और तुरंत किसानों को उत्पाद का पैसा सीधा उनके बैंक खाते में भेज दिया जाता है। उसके बाद ही वे कारखाने से बाहर जाते हैं। ऐसा करके सबसे पहले उन्हें पैसा समय पर मिल जाता है और उन्हें किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। हम किसान और समाज के लिए ही कार्य करते हैं और पूर्ण रूप से उन्हीं के लिए समर्पित हैं। §֍:आपके उत्पाद में कितनी शुद्धता है?§ֆ:मेरे कारखाने में कोविड महामारी के अंत में गुड़ बनना शुरु हुआ था। उस दिन से आज तक हमारे गुड़ में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आई है। हमारे उत्पाद को देश के कई राज्यों में निर्यात किया जाता है। साथ ही विदेशों में भी उत्पाद का परीक्षण कई बार किया गया है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई कमी नहीं पाई गई। मशीनों के स्वचालित होने के कारण उत्पाद में कोई तिनका, छिलका, मिट्टी, बीड़ी, टोटा, कुछ नहीं निकला और नहीं जा सकता है। अगर कभी ऐसा होता है तो मशीन खुद ही रुक जाती है। यानि कोई ऐसा जरिया ही नहीं है कि मशीन में गन्ना का रस छोड़कर दूसरी चीज डाली जाए। 60 परिवार मेरे उपर ही केंद्रित हैं, जो मेरे साथ ही लगकर कार्य करते हैं। मेरे गुड़ में पूर्ण रूप से शुद्धता और विटामिन प्रोटीन और बाकी पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा है इसलिए गुड़ का रंग गाढ़ा भूरा है। रंग और गन्ने की क्वालिटी को अगर एक तरफ रखा जाए तो हमारे उत्पाद में 100 प्रतिशत शुद्धता मिलती है। मेरे उत्पाद ने यूरोपियन पैरामीटर्स को भी पास किया है। वहां 500 पेस्टीसाइड का टेस्ट होता है, जिसमें कोई कमी नहीं आई। पंजाब, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल में अब हमारा गुड़ बढ़ता जा रहा है।§֍:शुरुआती दौर में आपको किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?§ֆ:मैंने आपको बताया कि हमारे गुड़ में पूर्ण रूप से पोषण होता है। इसी वजह से उत्पाद का रंग गाढे भूरे रंग का हो जाता है, जिस कारण लोगों को देखने में अजीब लगता था और वे खरीदने में हिचकते थे। इस वजह से हमे शुरुआती सालों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। लोगों को केवल लाल गुड़ ही पसंद है। लेकिन कुछ समय बाद लोगों को हमारे गुड़ में लाभ दिखा और उन्होंने हमें समर्थन देना शुरु किया। जब हमारा गुड़ नहीं बिक रहा था तो हमें कई लोगों ने कहा कि कुछ सालों में जब लोगों को असली गुड़ देखने मिलेगा तो वे आपके ही पास आएंग। मेरा यही सपना रहा है कि मैं अपने इलाके के लोगों को अपना गुड़ खिला सकूं क्योंकि हमारी गन्ना बेल्ट उत्तर प्रदेश में सभी लाल और साफ दिखने वाला गुड़ ही खाते है। §֍:किसानों और पाठकों को शुद्ध उत्पाद की ओर प्रोत्साहित करने के लिए क्या कहना चाहेंगे?§ֆ:जब मैंने सपने को साकार किया तो मैंने यही देखा की अभी तक बाजार में पूर्ण रूप से शुद्ध गुड़ नहीं पहुंचा है। हमारे यहां पहले शुद्धता है, लेकिन उसमें पूर्ण रूप से पोषण तत्व की मौजूदगी नहीं हो पाती है। इसी को देखते हुए मैंने सोचा कि क्यों न मैं ऐसी फैक्ट्री लगाऊं जिसमें किसी प्रकार का जहरीला पदार्थ न मिला हो। शुरुआत होने से पहले ही मैंने सोच लिया था कि मेरे कारखाने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं होगी। मैं सभी को यही कहना चाहुंगा कि शुद्ध और स्वच्छ उत्पाद के बारे में आपको जागरुक होना पड़ेगा। किसी भी उत्पाद को देखने भर से आप शुद्धता नहीं माप सकते। आप हमेशा शुद्ध खाइये, स्वच्छ खाइए और स्वस्थ्य रहिए।§बाजार में शुद्धता अब नहीं बची है। कई खाद्य उत्पादों में मिलवट के हर दूसरे दिन मामले सामने आते हैं। बाजारों में गुड़ भी काफी मिलावट के साथ बेचा जाता है। इसी क्रम में फसल क्रांति के संवाददाता आर्यामन यादव ने हंस हेरिटेज के संस्थापक के. पी. सिंह से संवाद किया। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ मुख्य अंश..

