ֆ:यह बैठक पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें गडवासु के कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण शिक्षा को सशक्त बनाना, कृषि और पशुपालन विज्ञान के प्रति जागरूकता फैलाना, और एग्री-फूड स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देना था।डॉ. गोसल ने अपने स्वागत भाषण में पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय स्तर पर कृषि विषय को शामिल किया जाना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि पीएयू के छह वर्षीय बी.एससी (ऑनर्स) कृषि कार्यक्रम से बड़ी संख्या में ग्रामीण छात्र शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक के रूप में उभरे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि स्कूलों में कृषि विषय शुरू किया जाए तो इससे कृषि स्नातकों के लिए शिक्षक बनने के अवसर भी पैदा होंगे।§ֆ:डॉ. जे.पी.एस. गिल ने ग्रामीण विद्यार्थियों में पशु चिकित्सा विज्ञान की जागरूकता की कमी की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि स्कूलों में इस विषय को लोकप्रिय बनाकर युवाओं को करियर विकल्पों के प्रति जागरूक किया जा सकता है।डॉ. अमरपाल सिंह ने पीएयू में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए कक्षा 10 स्तर पर कृषि पाठ्यक्रम शुरू करने और उच्च शिक्षा में क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने “प्री-ग्रेजुएशन स्कूल” की संकल्पना पेश की जिससे कृषि विश्वविद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया को सरल किया जा सके। उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी की आवश्यकता और शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण पर भी बल दिया।§ֆ:बल मुकंद शर्मा ने विद्यार्थियों को कृषि आधारित स्टार्टअप्स के लिए तैयार करने हेतु कोर्स मॉड्यूल में सुधार और मेंटोरशिप कार्यक्रमों को शामिल करने की जरूरत बताई। उन्होंने आंगनवाड़ियों में पौष्टिक और हर्बल गार्डन स्थापित करने का सुझाव दिया, जिससे खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।§ֆ:उन्होंने स्कूलों में “कृषि प्रदर्शनियों” के आयोजन का प्रस्ताव रखा, जहां कृषि मूल्य श्रृंखला, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सफल कहानियों को प्रदर्शित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल स्टाफ को स्वच्छता और पोषण के विषय में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता बताई और पीएयू की कम्युनिटी साइंस विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का सुझाव दिया। साथ ही, ‘चंगी खेती’ और ‘प्रोग्रेसिव फार्मिंग’ जैसी पीएयू की पत्रिकाओं को स्कूल, पंचायत और सहकारी पुस्तकालयों में वितरित करने की सिफारिश की।बैठक के दौरान पीएयू अधिकारियों ने कौशल विकास, कृषि उद्यमिता, किचन गार्डनिंग, व्यावसायिक प्रशिक्षण, और ग्रामीण छात्रों के नामांकन जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की।§ֆ:कार्यक्रम का समन्वय डॉ. टी.एस. रियार, अतिरिक्त निदेशक (संचार), पीएयू ने किया और डॉ. विशाल बेक्टर, एसोसिएट डायरेक्टर (इंस्टिट्यूशन रिलेशंस), पीएयू ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।बैठक का समापन ग्रामीण शिक्षा और कृषि विकास को नवाचार और सहभागिता के माध्यम से पुनः परिभाषित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।§पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना में एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के दो प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों ने भाग लिया। डॉ. अमरपाल सिंह, पूर्व आईएएस अधिकारी और वर्तमान में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के अध्यक्ष तथा बल मुकंद शर्मा, पंजाब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष, ने पीएयू और गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासु) के वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद किया।

