भारत को घोड़ा पालन और खेल जगत में एक बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे समय से देश के घोड़ों को इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेने और विदेशों में बेचने में एक खास बीमारी Glanders के चलते रोक का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब इस बीमारी से जुड़ा संकट काफी हद तक समाप्त हो गया है।
क्या है Glanders बीमारी?
Glanders एक संक्रामक और जानलेवा बीमारी है जो खासकर घोड़ों, खच्चरों और गधों में पाई जाती है। यह इंसानों में भी फैल सकती है। बीमारी के चलते कई देशों ने भारत के घोड़ों पर पाबंदी लगा रखी थी। लेकिन अब भारत में इस बीमारी को नियंत्रित करने में सफलता मिली है।
अब क्या बदलेगा?
भारत के घोड़े अब इंटरनेशनल स्पर्धाओं जैसे ओलंपिक, एशियाई खेल और अन्य घुड़सवारी मुकाबलों में भाग ले सकेंगे।
विदेशों में भारतीय नस्लों के घोड़ों की बिक्री और निर्यात का रास्ता साफ हो गया है।
इससे न सिर्फ खेल जगत में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी, बल्कि घोड़ा पालन और पशुपालन क्षेत्र को आर्थिक रूप से भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की बड़ी भूमिका
भारतीय पशुपालन विभाग और कृषि मंत्रालय ने मिलकर Glanders को काबू में करने के लिए टेस्टिंग, क्वारंटीन और टीकाकरण जैसे कदम उठाए। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार भारत अब इस बीमारी से मुक्त देशों की सूची में आने की प्रक्रिया में है।
उद्योग को मिलेगा लाभ
जानकारों का मानना है कि भारत में घोड़ा पालन उद्योग को इस फैसले से बड़ा फायदा मिलेगा। खासकर मारवाड़ी, कठियावाड़ी और सिंधी नस्ल के घोड़ों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है।

