आगामी खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच The Fertiliser Association of India ने स्पष्ट किया है कि देश में यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों का भंडार कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। संगठन के अनुसार वैश्विक स्तर पर कुछ भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद किसानों के लिए उर्वरक आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की संभावना नहीं है।
एफएआई के प्रवक्ता ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय उर्वरक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर आशंकाएं जरूर पैदा हुई हैं, लेकिन भारत में मौजूदा भंडार और आपूर्ति व्यवस्था ऐसी है कि आने वाले खरीफ मौसम में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उर्वरक उद्योग केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में उर्वरकों के सुचारु वितरण को सुनिश्चित करने के लिए लगातार समन्वय कर रहा है।
भारत में इस समय कृषि का अपेक्षाकृत शांत दौर चल रहा है और खरीफ फसलों की बुवाई आम तौर पर जून से शुरू होती है। इस अवधि में उर्वरकों की खपत सामान्य रहती है, जिससे उद्योग को अपने भंडार को फिर से भरने और उत्पादन इकाइयों में नियमित रखरखाव कार्य करने का अवसर मिल जाता है।
उद्योग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025–26 के पहले दस महीनों में भारत में उर्वरकों के उत्पादन और आयात दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की समान अवधि में जहां कुल उपलब्धता लगभग 57 मिलियन टन थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर करीब 65 मिलियन टन तक पहुंच गई है। इसमें यूरिया, डीएपी, कॉम्प्लेक्स उर्वरक, एसएसपी और एमओपी जैसे प्रमुख उर्वरक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों का निरंतर उत्पादन तथा समय पर आयात होने से देश में प्रमुख पोषक तत्वों का पर्याप्त भंडार बना हुआ है। खास तौर पर डीएपी और एनपीके उर्वरकों का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ा है, जिससे किसी क्षेत्र में अस्थायी आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी किसानों की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
हालांकि उर्वरक उद्योग का एक बड़ा हिस्सा यूरिया उत्पादन के लिए आयातित आरएलएनजी गैस पर निर्भर है और इसका महत्वपूर्ण भाग पश्चिम एशिया से आता है। मौजूदा परिस्थितियों के कारण गैस आपूर्ति पर कुछ असर जरूर पड़ा है। इस स्थिति में उद्योग सरकार के साथ मिलकर गैस आवंटन को प्राथमिकता देने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि आगामी मौसम के लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
फॉस्फेटिक उर्वरकों के मामले में भारत ने अपने आयात स्रोतों को विविध बनाया है। देश मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, रूस और बेलारूस जैसे देशों से कच्चा माल और उर्वरक प्राप्त कर रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
उद्योग से जुड़ी कंपनियां भी दीर्घकालिक समझौतों के जरिए कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं। भारतीय उर्वरक कंपनियां जैसे Indian Potash Limited, Coromandel International Limited और Paradeep Phosphates Limited ने वैश्विक उत्पादकों के साथ फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया और रॉक फॉस्फेट की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक अनुबंध कर रखे हैं, जिससे अल्पकालिक आपूर्ति स्थिर बनी रहती है।
एफएआई के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण सल्फर और अमोनिया जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में उद्योग सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा कि खरीफ सीजन के लिए तय की जाने वाली न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी दरें कच्चे माल की कीमतों और विनिमय दर में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तय की जाएं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भंडार, निरंतर उत्पादन और विविध आयात स्रोतों के कारण आगामी खरीफ मौसम में देश में उर्वरकों की आपूर्ति सामान्य बनी रहने की उम्मीद है, जिससे किसानों की खेती-किसानी गतिविधियों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

