• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
Advertisement
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home योजना

PKVY Scheme परंपरागत कृषि विकास योजना: जैविक खेती से किसानों की बढ़ती कमाई की पूरी कहानी

Paramparagat Krishi Vikas Yojana: The complete story of increasing income of farmers through organic farming

Fiza by Fiza
May 13, 2026
in योजना
0
PKVY Scheme

PKVY Scheme

0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

PKVY Scheme: भारत में खेती लंबे समय तक रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर रही है। इससे उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन मिट्टी की उर्वरता, पानी की गुणवत्ता और किसानों की लागत पर असर पड़ा। इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ाने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) शुरू की। आज यह योजना देशभर के लाखों किसानों के लिए नई उम्मीद बन चुकी है।

यह योजना किसानों को सिर्फ जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित नहीं करती, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, प्रमाणन, मार्केटिंग और आर्थिक सहायता भी देती है। यही वजह है कि कई किसान अब रसायन मुक्त खेती को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

क्या है परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)

परंपरागत कृषि विकास योजना यानी PKVY भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था। यह योजना राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत चलाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना और खेती की लागत कम करना है।

इस योजना के तहत किसानों को समूह या क्लस्टर बनाकर जैविक खेती करने के लिए सहायता दी जाती है। एक क्लस्टर में लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया जाता है। योजना में PGS-India प्रमाणन प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को जैविक उत्पाद बेचने में आसानी मिलती है।

योजना की शुरुआत क्यों हुई

भारत में लगातार रासायनिक खेती बढ़ने से कई समस्याएँ सामने आने लगी थीं:

  • मिट्टी की उर्वरता कम होना
  • खेती की लागत बढ़ना
  • किसानों की आय पर दबाव
  • स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर
  • जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग

इन समस्याओं को कम करने के लिए सरकार ने PKVY की शुरुआत की। इसका मकसद किसानों को कम लागत वाली टिकाऊ खेती से जोड़ना था।

PKVY योजना के मुख्य उद्देश्य

1. जैविक खेती को बढ़ावा देना

किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रेरित करना।

2. मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना

जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों से मिट्टी को स्वस्थ बनाना।

3. किसानों की लागत कम करना

महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता घटाना।

4. किसानों की आय बढ़ाना

जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाना।

5. पर्यावरण संरक्षण

पानी, मिट्टी और जैव विविधता को सुरक्षित रखना।

PKVY योजना कैसे काम करती है

यह योजना क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम करती है। इसमें किसानों को समूह बनाकर जैविक खेती कराई जाती है।

योजना की प्रक्रिया

  1. किसानों का समूह बनाया जाता है
  2. क्लस्टर का चयन किया जाता है
  3. किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है
  4. जैविक खेती शुरू कराई जाती है
  5. PGS प्रमाणन कराया जाता है
  6. उत्पाद की मार्केटिंग में सहायता दी जाती है

किसानों को कितनी आर्थिक सहायता मिलती है

सरकार PKVY के तहत किसानों को तीन साल तक वित्तीय सहायता देती है। PIB के अनुसार किसानों को 3 वर्षों में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 तक सहायता मिलती है।

इसमें शामिल हैं:

  • जैविक इनपुट के लिए सहायता
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
  • प्रमाणन खर्च
  • पैकेजिंग और ब्रांडिंग
  • मार्केटिंग सहायता

सरकार DBT के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में पैसा भेजती है।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला

पिछले कुछ वर्षों में जैविक खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। कई राज्यों में हजारों किसान इस योजना से जुड़े हैं। हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार लाखों हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के अंतर्गत लाई गई है।

योजना से किसानों को ये बड़े फायदे मिले:

  • रासायनिक लागत में कमी
  • जैविक उत्पादों की बेहतर कीमत
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
  • प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता रुझान
  • किसानों के समूह और FPO मजबूत हुए

हिमाचल प्रदेश में ही 2024-25 तक 31,000 से अधिक किसानों को लाभ मिला और हजारों हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के तहत लाई गई।

किन राज्यों में किसान योजना का लाभ उठा सकते हैं

यह योजना लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। खासतौर पर इन राज्यों में इसका अच्छा प्रभाव देखा गया है:

  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • राजस्थान
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • बिहार
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • तमिलनाडु
  • कर्नाटक
  • केरल
  • असम
  • मेघालय
  • सिक्किम

पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों को योजना में अधिक केंद्रीय सहायता दी जाती है।

कौन किसान योजना के लिए पात्र हैं

इस योजना का लाभ छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के साथ दिया जाता है।

पात्रता

  • किसान भारतीय नागरिक हो
  • किसान के पास खेती योग्य भूमि हो
  • किसान जैविक खेती अपनाने के लिए तैयार हो
  • समूह या क्लस्टर में शामिल होना जरूरी
  • अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को प्राथमिकता

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

PKVY योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के पास ये दस्तावेज होने चाहिए:

  • आधार कार्ड
  • भूमि दस्तावेज
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • पहचान पत्र
  • जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • समूह या क्लस्टर का विवरण

कुछ राज्यों में अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

PKVY योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे करें

किसान अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि अधिकारी से संपर्क कर योजना में आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया

चरण 1: कृषि विभाग से संपर्क

सबसे पहले किसान को अपने जिले के कृषि कार्यालय जाना होता है।

चरण 2: क्लस्टर में शामिल होना

योजना समूह आधारित है, इसलिए किसान को किसी क्लस्टर से जुड़ना होता है।

चरण 3: दस्तावेज जमा करना

आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।

चरण 4: सत्यापन

अधिकारियों द्वारा भूमि और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।

चरण 5: प्रशिक्षण

किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग दी जाती है।

चरण 6: सहायता राशि

योग्य किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है।

PGS प्रमाणन क्या है

PKVY में PGS यानी Participatory Guarantee System का उपयोग किया जाता है। यह एक सरल और कम लागत वाला जैविक प्रमाणन मॉडल है।

इससे किसानों को फायदा मिलता है:

  • कम खर्च में प्रमाणन
  • स्थानीय स्तर पर मान्यता
  • जैविक बाजार तक पहुंच
  • बेहतर दाम

किसानों के लिए योजना क्यों महत्वपूर्ण है

आज के समय में खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। रासायनिक खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी पर बढ़ते खर्च ने किसानों की आय पर सीधा असर डाला है। ऐसे में जैविक खेती किसानों के लिए एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम करने में मदद मिल रही है। जैविक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम या पूरी तरह बंद कर दिया जाता है, जिससे किसानों का खर्च घटता है। इसके स्थान पर गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और भूमि की उर्वरता में सुधार होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार रसायनों के उपयोग से मिट्टी कमजोर हो जाती है, जबकि जैविक खेती मिट्टी को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसके अलावा जैविक उत्पादों की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है। लोग अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और रसायन मुक्त अनाज, फल और सब्जियां खरीदना पसंद कर रहे हैं। इससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर दाम मिल सकता है। जैविक भोजन को स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं होता। यही कारण है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारतीय जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। कई किसान अब जैविक उत्पादों का निर्यात करके अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस तरह जैविक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है बल्कि बेहतर आय, स्वस्थ मिट्टी और नए बाजार के अवसर भी प्रदान करती है।

जैविक खेती में किसानों की चुनौतियाँ

हालांकि योजना फायदेमंद है, लेकिन किसानों को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।

  • शुरुआती उत्पादन कम होना
  • बाजार तक पहुंच की समस्या
  • जागरूकता की कमी
  • प्रमाणन प्रक्रिया की जानकारी कम होना
  • जैविक इनपुट की उपलब्धता

सरकार अब इन चुनौतियों को कम करने के लिए प्रशिक्षण और मार्केटिंग सहायता बढ़ा रही है।

प्राकृतिक खेती और PKVY

भारत में खेती को अधिक टिकाऊ और कम लागत वाला बनाने के लिए सरकार अब प्राकृतिक खेती और जैविक खेती पर विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। इस योजना के माध्यम से किसानों को रसायन मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कई राज्यों में अब PKVY के साथ प्राकृतिक खेती मॉडल को भी जोड़ा गया है, जिससे किसानों को खेती की नई और बेहतर तकनीकों की जानकारी मिल रही है।

प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता। इसके बजाय गोबर, गोमूत्र, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिल सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हजारों किसान प्राकृतिक खेती मॉडल से जुड़ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में तो बड़ी संख्या में किसानों ने रसायन मुक्त खेती को अपनाकर सफल उत्पादन हासिल किया है। सरकार किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और मार्केटिंग सपोर्ट भी दे रही है ताकि वे आसानी से जैविक और प्राकृतिक खेती कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी को सुरक्षित रखने और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि सरकार PKVY के जरिए इस मॉडल को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

महिलाओं और युवा किसानों की बढ़ती भागीदारी

परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत अब बड़ी संख्या में महिला किसान और युवा खेती से जुड़ रहे हैं। पहले जहां जैविक खेती को केवल पारंपरिक तरीका माना जाता था, वहीं अब यह युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और बेहतर आय का नया माध्यम बनती जा रही है। सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

गांवों में महिला स्वयं सहायता समूह जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने, जैविक खाद बनाने और जैविक उत्पादों की पैकेजिंग एवं बिक्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कई महिलाएं अब सब्जियों, मसालों और अनाज की जैविक खेती करके अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

दूसरी ओर युवा किसान आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके जैविक खेती को नए स्तर पर ले जा रहे हैं। कई युवा किसान सोशल मीडिया, ऑनलाइन मार्केट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचा रहे हैं। इससे उन्हें बिचौलियों पर कम निर्भर रहना पड़ता है और उत्पाद का बेहतर दाम मिलता है।

आज कई युवा खेती को स्टार्टअप और बिजनेस मॉडल की तरह देख रहे हैं। वे जैविक फल, सब्जियां, अनाज और अन्य उत्पादों की ब्रांडिंग करके शहरों तक पहुंच बना रहे हैं। इससे खेती के प्रति युवाओं की सोच भी बदल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं और युवाओं की भागीदारी इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में जैविक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। PKVY इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रही है।

बाजार में बढ़ रही जैविक उत्पादों की मांग

भारत में ऑर्गेनिक फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में लोग अब रसायन मुक्त अनाज, फल और सब्जियां ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है:

  • बेहतर कीमत
  • सीधी बिक्री
  • ब्रांडिंग का मौकाऑनलाइन मार्केटिंग

सरकार की आगे की योजना

सरकार आने वाले वर्षों में जैविक खेती का दायरा और बढ़ाना चाहती है। इसके लिए:

  • नए क्लस्टर बनाए जा रहे हैं
  • किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है
  • FPO को मजबूत किया जा रहा है
  • प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है

निष्कर्ष

परंपरागत कृषि विकास योजना यानी PKVY आज किसानों के लिए सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि टिकाऊ खेती की नई दिशा बन चुकी है। यह योजना किसानों को रसायन आधारित खेती से निकालकर कम लागत और बेहतर आय वाले मॉडल की ओर ले जा रही है।

अगर किसान सही प्रशिक्षण, जैविक तकनीक और बाजार से जुड़ाव पर ध्यान दें, तो PKVY आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। जैविक खेती सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

Tags: Benefits for FarmersGovernment SchemeIndian Agriculture SchemeNatural Farming IndiaOrganic Farming BenefitsOrganic Farming Scheme IndiaParamparagat Krishi Vikas YojanaPKVY Registration ProcessPKVY SchemePKVY States List
Previous Post

विज्ञान टेक 2026 में भारत के नवाचार और तकनीकी शक्ति का बड़ा प्रदर्शन

Next Post

एआई मौसम पूर्वानुमान से बदलेगी भारत की कृषि और आपदा तैयारी

Next Post
एआई मौसम पूर्वानुमान

एआई मौसम पूर्वानुमान से बदलेगी भारत की कृषि और आपदा तैयारी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • एआई मौसम पूर्वानुमान से बदलेगी भारत की कृषि और आपदा तैयारी
  • PKVY Scheme परंपरागत कृषि विकास योजना: जैविक खेती से किसानों की बढ़ती कमाई की पूरी कहानी
  • विज्ञान टेक 2026 में भारत के नवाचार और तकनीकी शक्ति का बड़ा प्रदर्शन
  • बिग कैट संरक्षण 2026: भारत करेगा वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक नेतृत्व
  • ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में बढ़ोतरी, कृषि क्षेत्र को मिली नई मजबूती

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.