नई दिल्ली: संसद में कृषि मंत्रालय की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दे जोर-शोर से उठाए गए। अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने पंजाब के किसानों के लिए 50,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग करते हुए कहा कि राज्य के किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अब रद्द हो चुके कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान पंजाब में करीब 750 किसानों की मौत हुई थी और उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। पराली जलाने के मुद्दे पर वारिंग ने सुझाव दिया कि सरकार हर किसान को 5,000 रुपये का प्रोत्साहन दे, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या पर काबू पाया जा सके।
वारिंग ने केंद्र और पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के बीच टकराव का आरोप लगाते हुए कहा कि इस वजह से राज्य के किसानों को आपदा राहत कोष के तहत बाढ़ राहत नहीं मिल पाई।
वहीं, कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने दालों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे तेलंगाना के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। रेड्डी ने सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए यह भी कहा कि देश में महंगाई दर कम होने से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ी है।
नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने सरकार से सोयाबीन, डेयरी उत्पादों और पशु चारे के आयात पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि आयात जारी रहने से इन क्षेत्रों से जुड़े किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा राशि को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की भी मांग रखी।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने केंद्र सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए एक विवादित घटना की ओर इशारा किया, जिसमें प्रदर्शन कर रहे किसानों पर वाहन चढ़ाने का आरोप लगा था। मंडल ने कहा कि इस मामले में अब तक कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई है।
इस तरह संसद में हुई बहस ने देशभर के किसानों की समस्याओं, मांगों और राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

