नासिक: लासलगांव और जिले की अन्य एपीएमसी मंडियों में मार्च-अप्रैल के दौरान तैयार होने वाली गर्मियों की प्याज की आवक शुरू हो गई है। हालांकि, बढ़ती सप्लाई और घटती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
गर्मियों की प्याज की खासियत इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है, जो छह महीने से ज्यादा होती है। यही वजह है कि ये प्याज अक्टूबर तक बाजार में बिकती रहती है, जब तक नई खरीफ फसल नहीं आ जाती। फिलहाल, गर्मियों की नई फसल का भाव करीब ₹1,320 प्रति क्विंटल है, जबकि खरीफ प्याज का औसत थोक भाव गिरकर ₹900 प्रति क्विंटल रह गया है, जो पिछले महीने ₹1,500 था।
किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतें उनकी उत्पादन लागत से भी कम हैं। महाराष्ट्र स्टेट ऑनियन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत दिघोले के अनुसार, प्याज की उत्पादन लागत लगभग ₹1,800 प्रति क्विंटल है। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि बाजार में अभी लेट खरीफ प्याज की सप्लाई ज्यादा है, जिसके कारण कीमतों में पिछले एक महीने में लगभग 40% की गिरावट आई है। किसान मजबूरी में अपनी फसल लागत से कम दाम पर बेच रहे हैं।
इस स्थिति को देखते हुए किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जिन किसानों ने पिछले छह महीनों में अपनी फसल लागत से कम पर बेची है, उन्हें ₹1,500 प्रति क्विंटल की ग्रांट दी जाए।
गौरतलब है कि जहां गर्मियों की प्याज को किसान स्टोर कर बेहतर कीमत का इंतजार कर सकते हैं, वहीं खरीफ और लेट खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ 25 दिनों से भी कम होती है। ऐसे में किसानों को तत्काल बाजार में उपलब्ध कीमत पर ही फसल बेचनी पड़ती है।
बुधवार को लासलगांव APMC में 14,498 क्विंटल लेट खरीफ प्याज की नीलामी हुई, जबकि गर्मियों की प्याज की आवक केवल 2,634 क्विंटल रही। बढ़ती आपूर्ति और घटते दामों के बीच किसान आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

