देश में मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य पालन, जलीय कृषि और मछुआरों के कल्याण के लिए 39,272 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं। इन पहलों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक, संगठित और अधिक लाभकारी बनाना भी है।
केंद्र सरकार ने इस दिशा में कई प्रमुख योजनाएं चलाई हैं। इनमें ब्लू रिवोल्यूशन योजना, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना और मछुआरों तथा मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा का विस्तार शामिल है। इन योजनाओं के माध्यम से मछली उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता, तकनीक, फसल कटाई के बाद की अवसंरचना, मूल्य शृंखला, ट्रेसबिलिटी और मछुआरों के कल्याण से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने के लिए जलीय कृषि, समुद्री मत्स्य पालन, खारे पानी की खेती, जलाशय मत्स्य पालन, अवसंरचना विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में पिछले पांच वर्षों, अर्थात 2020-21 से 2024-25 के दौरान, केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मत्स्य विकास परियोजनाओं को 21,274.16 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसमें केंद्र का हिस्सा 9,189.74 करोड़ रुपये रहा। तमिलनाडु के लिए अकेले प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 1,156.16 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई।
मछुआरों और मछली पालकों की कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा का विस्तार भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों, यानी 2022-23 से 2024-25 के दौरान, देशभर में 5,01,848 किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए। इनमें से 2,59,947 कार्ड केवल तमिलनाडु में स्वीकृत हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि इस राज्य में मत्स्य क्षेत्र को वित्तीय सहायता देने पर विशेष जोर दिया गया है।
मत्स्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत देशभर में 228 परियोजनाओं को 5,559.54 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इनमें तमिलनाडु के लिए 108 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी कुल लागत 2,169.03 करोड़ रुपये है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु देश के प्रमुख मत्स्य राज्यों में से एक बना हुआ है और वहां इस क्षेत्र के विस्तार के लिए व्यापक निवेश किया जा रहा है।
तमिलनाडु में पिछले पांच वर्षों और चालू वर्ष 2025-26 के दौरान कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 127.71 करोड़ रुपये की लागत से बहुउद्देशीय समुद्री शैवाल पार्क की स्थापना, पझायर और चेन्नई के मत्स्य बंदरगाहों का उन्नयन, चार एकीकृत फिश लैंडिंग केंद्रों का निर्माण तथा 417 कृत्रिम रीफ इकाइयों की स्थापना जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में नए ब्रूड बैंक, मीठे पानी की हैचरी, बायोफ्लॉक इकाइयां, खुले समुद्र में केज, समुद्री शैवाल कल्चर राफ्ट, अलंकरणीय मछली इकाइयां, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, फिश कियोस्क और मत्स्य परिवहन इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है।
सरकार ने पारंपरिक मछुआरों के लिए नाव, जाल, सुरक्षा किट, बायो-टॉयलेट और संचार व ट्रैकिंग उपकरण जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया है। साथ ही 2020-21 से 2025-26 के बीच 12,79,230 पारंपरिक मछुआरों को मछली पकड़ने पर प्रतिबंध या कम गतिविधि वाले समय में आजीविका और पोषण सहायता प्रदान की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आय बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान दे रही है।
इन योजनाओं के प्रभाव से देश के मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में देश का वार्षिक मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच गया। इसी अवधि में मत्स्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंचा। प्रति व्यक्ति मछली खपत 12 से 13 किलोग्राम तक बढ़ी है, जबकि जलीय कृषि की उत्पादकता 4.7 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंची है। सरकार का मानना है कि इन उपलब्धियों से मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में सुधार हुआ है। तमिलनाडु में भी योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान 2024-25 तक वार्षिक मछली उत्पादन बढ़कर 9.48 लाख टन हो गया।
मछुआरों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत समूह दुर्घटना बीमा योजना भी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। इस योजना में बीमा प्रीमियम का पूरा खर्च केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं, जबकि लाभार्थी से कोई अंशदान नहीं लिया जाता। इसके तहत मृत्यु या पूर्ण स्थायी दिव्यांगता पर 5 लाख रुपये, आंशिक स्थायी दिव्यांगता पर 2.5 लाख रुपये और दुर्घटना की स्थिति में 25 हजार रुपये तक अस्पताल खर्च का प्रावधान है। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच हर साल औसतन 34.49 लाख मछुआरों को बीमा सुरक्षा दी गई, जिनमें तमिलनाडु के 21.99 लाख मत्स्यकर्मी शामिल रहे।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने यह जानकारी दी। सरकार के इन प्रयासों से साफ है कि मत्स्य क्षेत्र को अब सिर्फ पारंपरिक आजीविका के रूप में नहीं, बल्कि आय, निर्यात, पोषण और ग्रामीण विकास के मजबूत आधार के रूप में विकसित किया जा रहा है।

