देश में डेयरी सेक्टर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और कुल दूध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। खास बात यह है कि गाय, भैंस और भेड़-बकरी तीनों के दूध उत्पादन में भारत का दबदबा कायम है। हालांकि, हाल ही में संसद में केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने राज्यों के बीच दिलचस्प प्रतिस्पर्धा और कुछ चौंकाने वाले रुझान सामने रखे हैं।
अगर केवल गाय के दूध उत्पादन की बात करें तो राजस्थान देश में पहले नंबर पर है। साल 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 1.48 करोड़ टन गाय के दूध का उत्पादन हुआ। यह आंकड़ा न केवल अन्य राज्यों से आगे है, बल्कि यह दिखाता है कि राज्य में डेयरी और पशुपालन को लेकर किस तरह का मजबूत ढांचा विकसित हुआ है।
राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 1.31 करोड़ टन गाय के दूध का उत्पादन दर्ज किया गया। यूपी और राजस्थान के बीच यह मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है और आने वाले वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
दक्षिण भारत के राज्य भी इस दौड़ में किसी से पीछे नहीं हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र ने अपने प्रदर्शन से सभी को हैरान किया है। कर्नाटक 1.05 करोड़ टन के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु 1.04 करोड़ टन और महाराष्ट्र 1.03 करोड़ टन उत्पादन के साथ उसके बेहद करीब हैं। मध्य प्रदेश ने भी एक करोड़ टन का आंकड़ा छूकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
वहीं, गुजरात जैसे राज्य का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। जहां डेयरी क्षेत्र में अमूल जैसी बड़ी सहकारी संस्था होने के बावजूद गुजरात केवल 97 लाख टन गाय का दूध ही उत्पादन कर पाया। यह आंकड़ा विशेषज्ञों के लिए भी हैरानी का विषय बना हुआ है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य, जिन्हें पारंपरिक रूप से पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है, गाय के दूध उत्पादन में काफी पीछे नजर आए हैं। हालांकि, इन राज्यों में भैंस पालन अधिक प्रचलित है, जो इस अंतर का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
दरअसल, भैंस सामान्यतः गाय की तुलना में अधिक दूध देती है। खासकर मुर्राह नस्ल की भैंस अपनी उच्च दुग्ध क्षमता के लिए जानी जाती है। इसके बावजूद देश में कुल उत्पादन के लिहाज से गाय के दूध का योगदान अधिक बना हुआ है, जो एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
गौरतलब है कि एक टन दूध लगभग 970 लीटर के बराबर होता है, जिससे इन आंकड़ों का वास्तविक पैमाना समझा जा सकता है। कुल मिलाकर, ये आंकड़े न सिर्फ राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को दिखाते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि डेयरी सेक्टर में अभी और सुधार और संभावनाएं मौजूद हैं।

