देश में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्र (AWCs) सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। ये केंद्र शुरुआती बचपन की देखभाल (ECCE), बच्चों के विकास के प्रति जागरूकता और पूरक पोषण जैसी सेवाएं 8.98 करोड़ पंजीकृत लाभार्थियों तक पहुंचा रहे हैं।
इस मिशन के तहत बच्चों के समग्र विकास के लिए दो नए पाठ्यक्रम ढांचे तैयार किए गए हैं —
“नवचेतना – जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए राष्ट्रीय उत्तेजना रूपरेखा (2024)” और
“आधारशिला – तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए राष्ट्रीय ECCE पाठ्यक्रम (2024)”।
इनका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों सहित सभी बच्चों को बेहतर सीखने का वातावरण प्रदान करना है।
‘पोषण ट्रैकर’: रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग का मजबूत प्लेटफॉर्म
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल ऐप विकसित किया है, जो आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों, कार्यकर्ता प्रदर्शन और लाभार्थियों की स्थितियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रैक करता है।
इस ऐप में—
- गर्भावस्था, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, स्तनपान और पूरक आहार पर परामर्श वीडियो,
- बच्चों की वृद्धि और पोषण स्तर से जुड़ा सार्वजनिक डैशबोर्ड,
- नियमित फील्ड-स्तरीय प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल हैं।
यह प्रणाली पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है।
‘पोषण भी पढ़ाई भी’: मास्टर ट्रेनर मॉडल के साथ बड़े स्तर पर क्षमता निर्माण
मिशन पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ (PBPB) पहल को संस्थागत रूप दिया गया है।
इसके अंतर्गत—
- सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) द्वारा स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर्स (SLMTs) को प्रशिक्षित किया जाता है।
- ये प्रशिक्षक आगे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर समान क्षमता-विकास सुनिश्चित होता है।
16 मार्च 2026 तक:
- 41,645 SLMTs तथा
- 10,35,949 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को Round-I में प्रशिक्षित किया जा चुका है,
- जबकि Round-II में 3,641 SLMTs का प्रशिक्षण चल रहा है।
समुदाय आधारित अभियान: जन आंदोलन के जरिए पोषण व्यवहार में सुधार
मिशन पोषण 2.0 के महत्वपूर्ण स्तंभों में समुदाय जागरूकता और जन-भागीदारी प्रमुख हैं।
- देशभर में सितंबर (पोषण माह) और मार्च–अप्रैल (पोषण पखवाड़ा) के दौरान बड़े पैमाने पर गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
- प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को हर माह दो कम्युनिटी बेस्ड इवेंट्स (CBEs) करना अनिवार्य है।
2018 से फरवरी 2026 तक:
- 150 करोड़ से अधिक जन आंदोलन गतिविधियाँ,
- 9.8 करोड़ CBEs आयोजित किए जा चुके हैं, जो पोषण व्यवहार में सुधार के प्रभावी मॉडल साबित हुए हैं।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशानिर्देश
मंत्रालय ने क्वालिटी एश्योरेंस, कर्तव्यधारकों की भूमिकाएं, खरीद प्रक्रिया, AYUSH के एकीकरण, और डेटा प्रबंधन से जुड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं।
इनका उद्देश्य—
- पोषण वितरण में पारदर्शिता,
- सुचारु संचालन,
- और तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत बनाना है।
NITI Aayog की 2020 और 2025 की तृतीय-पक्ष मूल्यांकन रिपोर्ट ने भी मिशन पोषण को मल्न्यूट्रिशन से निपटने के लिए प्रभावी और प्रासंगिक पाया है।
SHGs के माध्यम से पोषण जागरूकता को मजबूती
DAY–NRLM के तहत बनाए गए 90.91 लाख स्वयं सहायता समूह (SHGs) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का कार्य कर रहे हैं।
हालांकि SHGs सीधे बच्चों के कल्याण पर काम नहीं करते, लेकिन—
- पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े प्रशिक्षण,
- समूह-आधारित चर्चाएं,
- सरकारी पोषण अभियानों को समर्थन
— SHG नेटवर्क ग्रामीण परिवारों में पोषण जागरूकता बढ़ाने में सहायक है।
मंत्रालय SHGs के लिए—
- ‘लखपति दीदी’ पहल,
- बैंक-लिंकिंग,
- सामुदायिक फंडिंग,
- तथा ऑनलाइन प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित कर रहा है।

