केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वर्ष 2014 से 15 मार्च 2026 तक गंगा और उसकी सहायक नदियों के पुनर्जीवन के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किया गया है। जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में इसकी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
अब तक ₹21,340 करोड़ जारी, 524 परियोजनाओं में 68% पूर्ण
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक कुल ₹21,340 करोड़ विभिन्न एजेंसियों को जारी किए, जिसमें ₹16,025.97 करोड़ केवल सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं के लिए हैं।
- कुल 524 परियोजनाएँ स्वीकृत
- फरवरी 2026 तक 355 परियोजनाएँ (68%) पूरी
- पिछले पाँच वर्षों में 208 परियोजनाओं का सफल निष्पादन
सीवेज प्रबंधन में अभूतपूर्व प्रगति
पिछले पाँच वर्षों में—
- 76 सीवेज अवसंरचना परियोजनाएँ पूर्ण
- कुल क्षमता: 3200 MLD
- नई 71 परियोजनाएँ, लागत ₹12,641 करोड़
- अतिरिक्त क्षमता: 2210 MLD
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण में भी मथुरा CETP (6.25 MLD) और जाजमऊ CETP (20 MLD) दो प्रमुख परियोजनाएँ पूरी की गईं।
जैव विविधता संरक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
1. बायोडायवर्सिटी पार्क और वेटलैंड्स
- उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में 7 बायोडायवर्सिटी पार्क
- UP (3), बिहार (1), झारखंड (1) में 5 प्रमुख वेटलैंड्स स्वीकृत
2. वनरोपण
- गंगा तट पर 33,024 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण
- व्यय: लगभग ₹414 करोड़
3. मत्स्य संरक्षण
- 203 लाख IMC फिंगरलिंग्स गंगा में छोड़े गए
- डॉल्फ़िन और मछुआरों की आजीविका संरक्षण में बड़ा योगदान
4. जलजीव प्रजाति संरक्षण
- डॉल्फ़िन, ऊदबिलाव, हिल्सा, कछुए और घड़ियाल के लिए विज्ञान-आधारित संरक्षण कार्यक्रम
- 8507 किमी नदी क्षेत्र में डॉल्फ़िन सर्वे
- 6324 गंगा डॉल्फ़िन दर्ज
- देश की पहली डॉल्फ़िन रेस्क्यू एम्बुलेंस जनवरी 2026 में लॉन्च
कछुआ संरक्षण
- 387 घोंसलों (8257 अंडों) की सुरक्षा
- 7979 हैचलिंग्स नदी में सफल वापसी (सफलता दर 96.7%)
SMART-आधारित रिवर पेट्रोलिंग
- चंबल नदी पर 210 किमी क्षेत्र में लागू, तकनीकी निगरानी सुदृढ़
जल गुणवत्ता में सुधार: CPCB के आँकड़े
pH और DO
गंगा के सभी मापस्थलों पर स्नान मानकों के अनुरूप पाए गए।
BOD
Uttarakhand, Bihar, Jharkhand, West Bengal में सभी स्थान उपयुक्त;
UP के कुछ स्थानों पर सुधार की आवश्यकता—
- फर्रुखाबाद – पुराना राजापुर
- दलमऊ (रायबरेली)
- मिर्जापुर – तरिघाट
फीकल कॉलिफॉर्म में उल्लेखनीय गिरावट
वाराणसी (अस्सी घाट)
- 2014: 2500 MPN/100mL
- 2025: 790 MPN/100mL
पटना (गांधी घाट)
- 2014: 5400
- 2025: 2200
यह साफ दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं।
बायोमॉनिटरिंग रिपोर्ट (2024–25)
गंगा व उसकी सहायक नदियों के 50 स्थलों और यमुना बेसिन के 26 स्थलों पर जैविक जल गुणवत्ता गुड से मॉडरेट के बीच पाई गई। विविध जलीय जीवों की उपस्थिति नदी पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर क्षमता को दर्शाती है।
सरकार द्वारा संचालित नमामि गंगे कार्यक्रम ने
- सीवेज प्रबंधन,
- जैव विविधता संरक्षण,
- औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण,
- नदी तटीय वनरोपण,
- जलजीव संरक्षण,
—सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज की हैं।
गंगा की जल गुणवत्ता में निरंतर सुधार इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक संरक्षण योजना का प्रमाण है।

