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₹2481 करोड़ के राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन से 18 लाख से अधिक किसान जुड़े, मिट्टी स्वास्थ्य और आय सुधार पर फोकस

Fiza by Fiza
March 25, 2026
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₹2481 करोड़ के राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन से 18 लाख से अधिक किसान जुड़े, मिट्टी स्वास्थ्य और आय सुधार पर फोकस
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केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण दोहरी पहल शुरू की है। इसके तहत डीडीकेवाई (DDKY) और राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) को लागू किया जा रहा है, जिससे देश में टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 25 नवंबर 2024 को स्वीकृत National Mission on Natural Farming के लिए कुल ₹2481 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की लागत कम करना है।

इस योजना के तहत अब तक 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 18,786 क्लस्टर बनाए गए हैं, जबकि 18.19 लाख किसानों को इससे जोड़ा जा चुका है। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रति एकड़ प्रति वर्ष ₹4000 की प्रोत्साहन राशि (अधिकतम 1 एकड़ तक) दो वर्षों के लिए दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें प्रशिक्षण, पशुपालन सहायता और बाजार तक बेहतर पहुंच भी उपलब्ध कराई जा रही है।

गांव स्तर पर किसानों को मार्गदर्शन देने के लिए कृषि सखी और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs) तैनात किए गए हैं। अब तक Krishi Vigyan Kendra और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से 33,676 CRPs को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जो किसानों को प्राकृतिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दे रहे हैं।

इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों को बीजामृत, जीवामृत जैसे प्राकृतिक विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो रही है।

Indian Council of Agricultural Research भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ICAR द्वारा 16 राज्यों में 20 केंद्रों के माध्यम से प्राकृतिक खेती पर शोध किया जा रहा है। शोध में पाया गया है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से फसल उत्पादकता में लगभग 5% तक वृद्धि दर्ज की गई है।

मिट्टी के स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। 2-3 वर्षों में मृदा कार्बनिक कार्बन (SOC) का स्तर बढ़ा है और मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे भूमि की उर्वरता और उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।

प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आती है। किसान खेत में उपलब्ध गोबर, गोमूत्र और जैविक पदार्थों से ही आवश्यक सामग्री तैयार कर लेते हैं।

NITI Aayog की एक रिपोर्ट के अनुसार, 91.2% किसानों ने प्राकृतिक खेती से उत्पादकता बढ़ने की पुष्टि की है, जबकि 90.1% किसानों ने लागत में कमी और 68.5% किसानों ने मिट्टी स्वास्थ्य में सुधार की बात कही है।

सरकार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूत बना रही है। प्राकृतिक खेती के विस्तार से आने वाले समय में भारतीय कृषि अधिक सुरक्षित, सस्ती और लाभकारी बन सकती है।

 

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