केंद्र सरकार ने संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख सहित देशभर में अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों को माध्यमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक आगे बढ़ाने के लिए कई छात्रवृत्ति और अध्येतावृत्ति योजनाएं संचालित की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में सहायता देना और उच्च शिक्षा के अवसरों तक उनकी पहुंच बढ़ाना है। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के छात्रवृत्ति प्रभाग की ओर से लद्दाख सहित देश के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए पांच प्रमुख योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी), उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (NFST) और राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (NOS) शामिल हैं।
कक्षा 9 से स्नातकोत्तर तक छात्रवृत्ति का प्रावधान
मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजनाएं केंद्र प्रायोजित योजनाएं हैं, जिन्हें संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इन दोनों योजनाओं को ओपन एंडेड रखा गया है। यानी पात्र विद्यार्थियों की संख्या पर कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं है। जिन विद्यार्थियों के माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं है, वे कक्षा 9वीं से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक की पढ़ाई के लिए इन छात्रवृत्तियों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इन योजनाओं के तहत आवेदन आमंत्रित करने, आवेदनों के सत्यापन, लाभार्थियों के चयन और छात्रवृत्ति राशि के वितरण की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की होती है। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की ओर से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने तथा आवश्यक दस्तावेजों और अनिवार्य अनुपालन की जांच के बाद जनजातीय कार्य मंत्रालय केंद्रीय हिस्सेदारी की धनराशि जारी करता है।
इसके बाद संबंधित राज्य सरकार या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन पात्र अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराता है।
लद्दाख में मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति से 2025-26 में 1,394 विद्यार्थी लाभान्वित
लद्दाख में मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजना के तहत पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में 421 विद्यार्थियों को 10.81 लाख रुपये, 2021-22 में 1,439 विद्यार्थियों को 44.63 लाख रुपये और 2022-23 में 760 विद्यार्थियों को 23.15 लाख रुपये की राशि जारी की गई।
इसी तरह 2023-24 में 2,283 विद्यार्थियों को 69.21 लाख रुपये, 2024-25 में 1,694 विद्यार्थियों को 58.76 लाख रुपये और 2025-26 में 1,394 विद्यार्थियों को 50 लाख रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई।
मंत्रालय के अनुसार, इन आंकड़ों में नए विद्यार्थियों के साथ-साथ छात्रवृत्ति का नवीनीकरण कराने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं।
मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति में हजारों विद्यार्थियों को सहायता
मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत भी लद्दाख के विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिली है। वर्ष 2020-21 में 3,055 विद्यार्थियों को 857.79 लाख रुपये जारी किए गए। 2021-22 में 8,631 विद्यार्थियों को 185.77 लाख रुपये तथा 2022-23 में 9,619 विद्यार्थियों को 2,153.56 लाख रुपये की धनराशि जारी हुई।
वर्ष 2023-24 में 9,413 विद्यार्थियों को 2,500.44 लाख रुपये, 2024-25 में 8,847 विद्यार्थियों को 2,449.78 लाख रुपये और 2025-26 में 7,618 विद्यार्थियों को 2,245.90 लाख रुपये जारी किए गए।
इस योजना का उद्देश्य मैट्रिक के बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई को जारी रखने में आर्थिक सहयोग देना है, ताकि आर्थिक कारणों से अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी उच्च कक्षाओं और उच्च शिक्षा से बाहर न हों।
उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति में भी लद्दाख के छात्रों को लाभ
अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी) केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसे जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा सीधे लागू किया जाता है। इसमें राज्यवार धनराशि का आवंटन नहीं किया जाता और सहायता DBT के माध्यम से सीधे विद्यार्थियों या संबंधित संस्थानों को जारी की जाती है।
लद्दाख में इस योजना के तहत 2021-22 में 58 लाभार्थियों को 71.49 लाख रुपये, 2022-23 में 42 लाभार्थियों को 86.39 लाख रुपये और 2023-24 में 97 लाभार्थियों को 127.41 लाख रुपये जारी किए गए।
वर्ष 2024-25 में 83 विद्यार्थियों को 133.44 लाख रुपये तथा 2025-26 में 71 विद्यार्थियों को 75.74 लाख रुपये की राशि जारी हुई।
NFST के तहत शोध और उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन
अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (NFST) के माध्यम से उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की जा रही है। यह भी केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और इसकी धनराशि सीधे DBT के माध्यम से जारी की जाती है।
लद्दाख में NFST के तहत 2021-22 में 35 विद्यार्थियों को 140.41 लाख रुपये, 2022-23 में 49 विद्यार्थियों को 181.76 लाख रुपये और 2023-24 में 55 विद्यार्थियों को 367.41 लाख रुपये जारी किए गए।
वर्ष 2024-25 में 53 लाभार्थियों को 290.31 लाख रुपये तथा 2025-26 में 58 लाभार्थियों को 257.75 लाख रुपये की राशि जारी की गई।
विदेश में पढ़ाई के लिए भी छात्रवृत्ति
अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (NOS) के माध्यम से विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक पात्र विद्यार्थियों को सहायता दी जाती है। इस योजना को विदेश मंत्रालय के माध्यम से लागू किया जाता है। विदेश में अध्ययनरत चयनित विद्यार्थियों को भारतीय दूतावासों के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाती है। दूतावासों द्वारा किए गए भुगतान के आधार पर विदेश मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत वाउचर और बिलों के अनुसार जनजातीय कार्य मंत्रालय विदेश मंत्रालय को धनराशि की प्रतिपूर्ति करता है।
लद्दाख में इस योजना के तहत 2021-22 में एक विद्यार्थी को 1.50 लाख रुपये, 2022-23 में एक विद्यार्थी को 2.43 लाख रुपये और 2023-24 तथा 2024-25 में कोई लाभार्थी दर्ज नहीं हुआ। वर्ष 2025-26 में एक विद्यार्थी को 0.84 लाख रुपये की राशि जारी की गई।
केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं में राज्यवार आवंटन नहीं
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर योजनाओं के विपरीत उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति, NFST और राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं हैं। इनमें राज्यवार धनराशि का पूर्व निर्धारित आवंटन नहीं किया जाता। पात्रता और योजना के प्रावधानों के आधार पर विद्यार्थियों और संस्थानों को सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
2030-31 तक शिक्षा योजनाओं के विस्तार पर विचार
मंत्रालय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान शिक्षा संबंधी योजनाओं को जारी रखने के लिए व्यय वित्त आयोग (EFC) की मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। इसमें शैक्षणिक सहायता के दायरे को और बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के अधीन है।
सभी पात्र जनजातीय छात्रों तक पहुंच बनाने पर जोर
जनजातीय कार्य मंत्रालय का कहना है कि उसका लगातार प्रयास रहा है कि उसकी विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत सभी पात्र जनजातीय विद्यार्थियों का अखिल भारतीय स्तर पर कवरेज सुनिश्चित किया जाए। इसमें संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख भी शामिल है। इसके लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को समय-समय पर योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने तथा पात्र विद्यार्थियों तक जानकारी पहुंचाने के लिए परामर्श और निर्देश जारी किए जाते हैं।
सरकार की इन योजनाओं के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, शोध और विदेश में अध्ययन तक अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। लद्दाख के आंकड़े बताते हैं कि विशेष रूप से मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सहायता मिल रही है। इससे आर्थिक बाधाओं के बावजूद जनजातीय विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के अवसरों को बनाए रखने में मदद मिल रही है।
