अगर आप मूंग की खेती करने की योजना बना रहे हैं लेकिन किसी वजह से बुवाई में देरी हो गई है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। सही किस्म का चुनाव करके किसान देर से बुवाई में भी शानदार पैदावार हासिल कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देसी वैरायटी न सिर्फ कम समय में तैयार होती हैं, बल्कि स्थानीय मौसम के अनुरूप जल्दी ढलकर जोखिम भी कम कर देती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रभात और पंचवंग जैसी देसी मूंग की किस्में देर से बुवाई के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं। ये दोनों किस्में तेजी से बढ़ने वाली हैं और कम अवधि में तैयार होकर अच्छी उपज देती हैं। खास बात यह है कि ये वैरायटी बदलते मौसम और तापमान को भी आसानी से सहन कर लेती हैं, जिससे फसल खराब होने का खतरा कम रहता है।
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि अगर किसान मार्च के अंत तक इन किस्मों की बुवाई कर लेते हैं, तो उन्हें बेहतर उत्पादन मिल सकता है। प्रभात वैरायटी करीब 60-65 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि पंचवंग भी लगभग इतनी ही अवधि में पककर तैयार हो जाती है। इससे किसानों को जल्दी फसल काटने का मौका मिलता है और वे अगली फसल की तैयारी भी समय पर कर सकते हैं।
देर से बुवाई के दौरान खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। खेत को अच्छी तरह से जोतकर भुरभुरा बना लें और जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। बुवाई के समय उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण और धूप मिल सके। साथ ही, बीज उपचार करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है और अंकुरण बेहतर होता है।
खाद और उर्वरकों के संतुलित उपयोग से भी पैदावार बढ़ाई जा सकती है। जैविक खाद या गोबर की खाद का इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है, ताकि फसल स्वस्थ बनी रहे।
बाजार की मांग को देखते हुए मूंग की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बनती जा रही है। कम लागत, कम समय और अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में प्रभात और पंचवंग जैसी देसी वैरायटी किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती हैं।

