उत्तर प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से 27 से 31 मार्च के बीच राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ करीब 38 जिलों में बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, गरज-चमक के साथ होने वाली इस हल्की बारिश से तापमान में 3–4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है। वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, बलिया समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण मौसम में अचानक बदलाव महसूस होगा। दिन के समय जहां हल्की ठंडक का अहसास हो सकता है, वहीं सुबह और शाम के समय ठंडी हवाएं असर दिखाएंगी।
इसके अलावा, कई जिलों में बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है, जो लोगों और किसानों दोनों के लिए खतरे का संकेत है। वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या, रायबरेली, संत कबीर नगर और सोनभद्र जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खेतों में काम कर रहे किसानों को खुले स्थानों से बचने और मौसम खराब होने पर सुरक्षित जगह पर जाने की हिदायत दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे एक नहीं बल्कि दो नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, जिनका असर लगातार देखने को मिलेगा। इससे पहले 23 मार्च को हुई बारिश भी इसी तरह की मौसमी प्रणाली का परिणाम थी। आने वाले दिनों में भी ऐसे ही उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और वहां से आने वाली ठंडी हवाएं इस पूरे मौसम परिवर्तन की बड़ी वजह हैं। पहाड़ों की ठंडक का असर सीधे तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महसूस किया जा रहा है, जिसके चलते सुबह और शाम के समय हल्की सिहरन भी महसूस हो रही है।
किसानों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है। तैयार फसलों को सुरक्षित रखने, कटाई में तेजी लाने और खुले में रखी उपज को ढककर रखने की जरूरत है, ताकि मौसम के इस बदलते मिजाज से नुकसान को कम किया जा सके।

