भारत में कृषि योग्य भूमि के औसत आकार में लगातार गिरावट दर्ज होने के बावजूद खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि न केवल किसानों की मेहनत को दर्शाती है, बल्कि सरकार की योजनाओं, वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का भी परिणाम है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कृषि जनगणना 2015-16 में देश में औसत जोत का आकार घटकर 1.08 हेक्टेयर रह गया, जो 2010-11 में 1.15 हेक्टेयर था। इसका मतलब है कि किसानों के पास खेती के लिए उपलब्ध भूमि छोटी होती जा रही है। इसके बावजूद उत्पादन में वृद्धि इस बात का संकेत है कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2013-14 में जहां कुल उत्पादन 265 मिलियन टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 357.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इसी तरह, बागवानी क्षेत्र में भी बड़ी छलांग देखने को मिली है। 2013-14 में 277.4 मिलियन टन उत्पादन के मुकाबले 2024-25 में यह आंकड़ा 369.1 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों द्वारा उच्च मूल्य वाली फसलों और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने का परिणाम है।
सरकार ने कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY), फसल विविधीकरण कार्यक्रम, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना, बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (MIDH), और खाद्य तेलों व दलहन के लिए राष्ट्रीय मिशन जैसी पहलें किसानों को बेहतर विकल्प और संसाधन प्रदान कर रही हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को जलवायु-अनुकूल और उच्च लाभ देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ICAR द्वारा विभिन्न जलवायु और मिट्टी के अनुरूप नई फसल किस्मों का विकास किया गया है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच लगभग 2,900 नई फसल किस्में विकसित की गईं, जिनमें से 2,661 किस्में विभिन्न प्रकार के जैविक और अजैविक तनावों के प्रति सहनशील हैं। इससे किसानों को बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन करने में मदद मिल रही है।
इसके अलावा, छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन की योजना भी चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सामूहिक रूप से संगठित कर उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाई जा रही है। प्रत्येक FPO को वित्तीय सहायता, ऋण गारंटी और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे किसानों की लागत घटती है और आय में वृद्धि होती है।
राज्यसभा में जानकारी देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि सरकार के इन प्रयासों से कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सीमित भूमि के बावजूद उत्पादन में वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि देश की कृषि प्रणाली अधिक कुशल और आधुनिक बन रही है।

