किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बाजार में गिरती कीमतों से बचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) योजना देशभर में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। इस योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित कर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, जब भी दलहन, तिलहन और कोपरा जैसी अधिसूचित फसलों के बाजार भाव अधिकतम कटाई अवधि के दौरान MSP से नीचे चले जाते हैं, तब सरकार मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से किसानों से उनकी उपज MSP पर खरीदती है। इस व्यवस्था से किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाया जाता है और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलता है।
सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आय में स्थिरता लाने के लिए दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन को भी आगे बढ़ाया है। इसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक अरहर (तुअर), उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दालों की जितनी मात्रा किसान बेचने के लिए प्रस्तुत करेंगे, उतनी ही मात्रा की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी और दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
PM-AASHA योजना में मूल्य अंतर भुगतान योजना (PDPS) भी शामिल है, जो विशेष रूप से तिलहन किसानों के लिए लाभकारी है। इस योजना के तहत, यदि किसान अपनी उपज APMC मंडी में बेचते हैं और उन्हें MSP से कम मूल्य मिलता है, तो MSP और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खाते में जमा किया जाता है। इस प्रक्रिया में फसल की भौतिक खरीद नहीं होती, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बनी रहती है।
इसके अलावा, बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के माध्यम से उन फसलों को भी कवर किया जाता है जो MSP के दायरे में नहीं आतीं, विशेष रूप से जल्दी खराब होने वाली कृषि और बागवानी उपज। यह योजना राज्यों के अनुरोध पर लागू की जाती है और इसमें संभावित नुकसान का एक हिस्सा राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाता है। इससे किसानों को अधिक उत्पादन के समय कीमतों में गिरावट से बचाया जा सकता है।
सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया है। वर्ष 2025-26 से खरीद केंद्रों पर आधार-सक्षम POS मशीनों के माध्यम से किसानों की पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, मोबाइल ऐप के जरिए फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे फर्जी खरीद पर रोक लगाई जा सके।
कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कृषि अवसंरचना कोष (AIF) योजना के तहत किसानों, FPOs और अन्य हितधारकों को गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक इस योजना के तहत 1.71 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए ₹84,681 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा मिला है।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर की मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है। 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियां इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं, जिससे ₹4.82 लाख करोड़ से अधिक का व्यापार संभव हुआ है। इससे किसानों को पारदर्शी मूल्य और बेहतर बाजार तक पहुंच मिल रही है।
सरकार द्वारा 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन की योजना भी किसानों की सामूहिक ताकत को बढ़ा रही है। हजारों FPO अब e-NAM और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर सीधे बाजार तक पहुंच बना रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
राज्यसभा में जानकारी देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि MSP आधारित खरीद और PM-AASHA जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

