मध्य पूर्व में इस समय हालात तेजी से बदल रहे हैं और ईरान तथा इजराइल के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का कारण बनता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में ईरान को लेकर सख्त बयान देते हुए कहा कि अमेरिका के पास ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने के कई विकल्प मौजूद हैं और यह उनके लिए एक अहम रणनीतिक लक्ष्य हो सकता है। उन्होंने खार्ग द्वीप का उल्लेख करते हुए इसे ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र बताया और दावा किया कि इसकी सुरक्षा उतनी मजबूत नहीं है, जितनी मानी जाती है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान और इजराइल के बीच सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं, जहां मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है। इजराइल ने कई हमलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है, जबकि ईरान भी लगातार नए हमले कर रहा है। इस बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है, जहां सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिए गए हैं और कई जगहों पर सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का प्रभाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन गई है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों पर।
भारत के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि एलपीजी से भरे जहाज सुरक्षित रूप से अपने मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं और भारतीय नौसेना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है।

