आगामी खरीफ सीजन (Kharif Season) से पहले केंद्र सरकार ने देश के किसानों को बड़ी राहत देते हुए भरोसा दिलाया है कि इस बार उर्वरकों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार का कहना है कि वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के लिए अनुमानित 390 लाख टन खाद की मांग को पूरी तरह से पूरा करने की तैयारी कर ली गई है। घरेलू उत्पादन और आयात दोनों में सुधार के चलते स्थिति पहले से काफी बेहतर मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश में कुल उर्वरक स्टॉक 180 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल इसी अवधि के 147 लाख टन के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह बढ़ा हुआ स्टॉक इस बात का संकेत है कि सरकार ने समय रहते आपूर्ति को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। वहीं, पिछले खरीफ सीजन में 361 लाख टन उर्वरकों की वास्तविक बिक्री दर्ज की गई थी, जिससे इस साल की मांग का आकलन और रणनीति बनाने में भी मदद मिली है।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा के मुताबिक, मौजूदा स्टॉक में 62 लाख टन यूरिया, 23.4 लाख टन डीएपी, 12.7 लाख टन एमओपी और 86.8 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल और मई जैसे कम मांग वाले महीनों का उपयोग भंडारण बढ़ाने के लिए किया जाएगा, ताकि पीक सीजन में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
उत्पादन के मोर्चे पर भी हालात में सुधार देखा जा रहा है। सरकार ने उर्वरक संयंत्रों को गैस आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिसके बाद उत्पादन में तेजी आई है। फिलहाल देश के 30 में से 27 यूरिया प्लांट चालू हैं और गैस सप्लाई पहले के 60 फीसदी से बढ़कर करीब 80 फीसदी तक पहुंच गई है। पहले जहां उत्पादन में रोजाना 30-35 हजार टन की कमी देखी जा रही थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 67 हजार टन प्रतिदिन हो गया है। हालांकि, यह अभी भी सामान्य स्तर 80 हजार टन से थोड़ा कम है, लेकिन सुधार की दिशा स्पष्ट है।
कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर भी सरकार सतर्क है। भारत अपने डीएपी और यूरिया आयात का लगभग 30-30 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों से लेता है, जबकि एलएनजी का करीब 50 फीसदी भी वहीं से आता है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। इसके तहत मोरक्को, रूस समेत कई देशों से कच्चा माल मंगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों के साथ नए समझौते की दिशा में भी बातचीत जारी है।
कुल मिलाकर, सरकार की तैयारियों और बढ़ते स्टॉक को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस बार किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो खरीफ सीजन में खेती सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन और किसानों की आय दोनों में सुधार हो सकता है।

