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खीरा-भिंडी की फसल को कीटों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने बताए पर्यावरण अनुकूल उपाय

Fiza by Fiza
April 1, 2026
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खीरा-भिंडी की फसल को कीटों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने बताए पर्यावरण अनुकूल उपाय
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Punjab Agricultural University के कीट विज्ञान विभाग द्वारा किसानों को टिकाऊ और सुरक्षित खेती की दिशा में जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष फील्ड डे का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समराला के गांव बुर्मा में आयोजित हुआ, जिसमें खीरा और भिंडी की फसलों पर लगने वाले माइट (सूक्ष्म कीट) के पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन पर जोर दिया गया।

यह पहल कृषि एकारोलॉजी से जुड़े अखिल भारतीय नेटवर्क प्रोजेक्ट के तहत Krishi Vigyan Kendra Samrala के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक दवाओं के स्थान पर प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए Manmeet Brar Bhullar ने किसानों को माइट की पहचान, उनके जीवन चक्र और फसलों पर होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खीरा और भिंडी जैसी सब्जियों में माइट का प्रकोप तेजी से फैलता है, जिससे पत्तियों पर पीले धब्बे, मुड़ना और उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। ऐसे में समय रहते सही पहचान और प्रबंधन बेहद जरूरी है।

उन्होंने किसानों को बताया कि रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि बॉटनिकल यानी पौधों से बने प्राकृतिक उत्पाद सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हैं। फील्ड डे के दौरान किसानों को नीम आधारित उत्पादों और अन्य वनस्पति उपायों का प्रयोग खेत में करके भी दिखाया गया, जिससे उन्हें इन तकनीकों को समझने और अपनाने में आसानी हो।

इस मौके पर Vipin Rampal ने जैविक और बायोरैशनल तरीकों से कीट प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों और विश्वविद्यालय की गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी उपयोग करें।

कार्यक्रम में Vir Pratap ने क्षेत्र में सब्जी उत्पादन की स्थिति पर चर्चा की, जबकि Amanpreet Singh ने जैविक खेती में अपनाई जा रही तकनीकों के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि बाजार में भी अच्छे दाम मिलते हैं।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि MS Bhullar ने किसानों के लिए ऐसे फील्ड डे की उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और उनकी समस्याओं का समाधान मौके पर ही देने में मददगार होते हैं। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, संसाधनों के सही प्रबंधन और फसल विविधीकरण को अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और वैज्ञानिकों के साथ खुलकर संवाद किया। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और माइट नियंत्रण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त किए।

यह फील्ड डे न केवल किसानों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि उन्हें पर्यावरण के अनुकूल खेती अपनाने की दिशा में भी प्रेरित करता नजर आया। ऐसे प्रयास भविष्य में टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

 

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