कुवैत में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीयों के पार्थिव शरीर बुधवार (1 अप्रैल) को केरल के कोच्चि एयरपोर्ट पहुंचाए गए। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इन शवों को भारत लाने में देरी हुई थी। कुवैत एयरवेज की एक विशेष फ्लाइट कोलंबो के रास्ते कोच्चि पहुंची, जिसमें कोई यात्री सवार नहीं था। इस विमान का इस्तेमाल खासतौर पर मृतकों के शवों को स्वदेश लाने के लिए किया गया।
मृतकों में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलथुर निवासी 37 वर्षीय संथानसेल्वम कृष्णन भी शामिल हैं, जिनकी मौत ड्रोन हमले में हुई थी। यह हमला कुवैत के एक वाटर प्लांट पर हुआ था। इसके अलावा बाकी 19 भारतीयों की मौत अलग-अलग कारणों और प्राकृतिक परिस्थितियों में हुई थी, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते उनके शवों को समय पर भारत नहीं लाया जा सका।
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं और हर संभव मदद के लिए कुवैती अधिकारियों के संपर्क में हैं। दूतावास ने यह भी बताया कि वे सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसका असर आम नागरिकों पर भी साफ देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस संघर्ष के चलते अब तक कुल 8 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है। भारतीय दूतावास और सरकार लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि प्रभावित भारतीय नागरिकों की हर संभव सहायता की जा सके।
इस बीच, खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार भी सतर्क हो गई है। अनुमान के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं, जिन पर इस संघर्ष का सीधा असर पड़ रहा है। भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक मिडिल ईस्ट से करीब 55 लाख यात्री भारत लौट चुके हैं। सरकार का कहना है कि भारतीयों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, कुवैत से 20 भारतीयों के शवों की वापसी इस बात की याद दिलाती है कि वैश्विक संघर्षों का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

