भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि देश का पहला समर्पित “अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड” तेजी से आगे बढ़ रहा है और वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही से इसमें निवेश शुरू होने की उम्मीद है। यह फंड भारत के स्पेसटेक स्टार्टअप्स को वित्तीय और संरचनात्मक समर्थन प्रदान करेगा।
डॉ. सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि ₹1,005 करोड़ के इस फंड को भारत के स्पेस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस फंड का प्रबंधन SIDBI Venture Capital Limited (एसवीसीएल) द्वारा किया जा रहा है, जो देश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि इस फंड को 31 अक्टूबर 2025 को Securities and Exchange Board of India (सेबी) से पंजीकरण प्राप्त हुआ था, जिसके बाद 10 नवंबर 2025 को इसकी प्रारंभिक क्लोजिंग पूरी की गई। इसके साथ ही फंड ने अपने संचालन के लिए आवश्यक सभी प्रमुख औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
मंत्री के अनुसार, फंड के तहत कस्टोडियन की नियुक्ति, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) यूनिट्स जारी करने के लिए डिपॉजिटरी में पंजीकरण, और निवेश एवं स्क्रीनिंग समितियों का गठन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरे कर लिए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि फंड अब पूरी तरह से निवेश प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है।
वर्तमान में कई स्पेसटेक स्टार्टअप्स का मूल्यांकन किया जा रहा है। डॉ. सिंह ने बताया कि चार स्टार्टअप प्रस्ताव पहले ही उन्नत चरण में पहुंच चुके हैं और उन्हें प्री-इन्वेस्टमेंट कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत का स्पेसटेक इकोसिस्टम अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए कई स्टार्टअप्स को संस्थागत निवेश के मानकों के अनुरूप खुद को ढालने में समय और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
सरकार इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्टार्टअप्स को उनके डेटा प्रबंधन, दस्तावेज़ीकरण और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्टार्टअप्स निवेश के लिए पूरी तरह तैयार हों और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकें।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास जताया कि सभी तकनीकी और दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वित्तीय वर्ष 2027 की शुरुआत में निवेश का पहला चरण शुरू कर दिया जाएगा। इससे न केवल स्टार्टअप्स को पूंजी मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने नवाचारों को बड़े स्तर पर लागू करने का अवसर भी मिलेगा।
यह पहल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब तक अंतरिक्ष गतिविधियों में मुख्य रूप से सरकारी संस्थाओं का वर्चस्व रहा है, लेकिन इस फंड के जरिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को भी आगे आने का मौका मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वेंचर फंड से भारत का स्पेस सेक्टर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, ₹1,005 करोड़ का यह अंतरिक्ष वेंचर फंड भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल स्टार्टअप्स को वित्तीय समर्थन देगा, बल्कि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी देशों की श्रेणी में लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

