देश में किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने यूरिया वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग द्वारा यूरिया का राज्यवार आवंटन नियमित रूप से किया जा रहा है, जबकि सहकारी समितियों तक इसकी आपूर्ति में Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited (इफको) और Krishak Bharati Cooperative Limited (कृभको) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार के अनुसार, यूरिया का आवंटन मासिक आधार पर राज्यों को किया जाता है। इसके बाद संबंधित राज्य सरकारें अपनी उर्वरक वितरण नीति के तहत सहकारी समितियों, डीलरों और खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से किसानों तक इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं। राज्य के कृषि विभाग द्वारा जिले और ब्लॉक स्तर तक वितरण के निर्देश जारी किए जाते हैं, जिससे अंतिम छोर तक उर्वरक की उपलब्धता बनी रहे।
राजस्थान राज्य के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि इफको और कृभको के माध्यम से सहकारी समितियों को बड़े पैमाने पर यूरिया की आपूर्ति की जा रही है। इफको द्वारा वर्ष 2022-23 में लगभग 4.80 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई, जो 2024-25 में बढ़कर 5.07 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। वहीं, 2025-26 (फरवरी 2026 तक) में यह आंकड़ा 5.55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है, जो मांग और आपूर्ति के बेहतर संतुलन को दर्शाता है।
जिलावार आंकड़ों में गंगानगर, बीकानेर, भीलवाड़ा, नागौर और हनुमानगढ़ जैसे प्रमुख कृषि जिलों में यूरिया की अधिक खपत देखने को मिली है। यह संकेत देता है कि इन क्षेत्रों में कृषि गतिविधियां अधिक सक्रिय हैं और उर्वरकों की मांग भी ज्यादा है।
दूसरी ओर, कृभको द्वारा भी राज्य में निरंतर आपूर्ति की जा रही है। वर्ष 2023-24 में करीब 1.59 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई, जबकि 2024-25 में यह 1.47 लाख मीट्रिक टन रही। वर्ष 2025-26 (मार्च 2026 तक) में 1.13 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति दर्ज की गई है। हालांकि इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली है, लेकिन यह वितरण के क्षेत्रीय संतुलन और मांग के आधार पर किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सहकारी वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से उर्वरक दुकानों को “प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र” में परिवर्तित करना शामिल है। ये केंद्र किसानों के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में विकसित किए जा रहे हैं, जहां उन्हें उर्वरक, बीज, कीटनाशक, मृदा परीक्षण और कृषि परामर्श जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।
इसके अलावा, उर्वरकों के ब्रांडिंग में एकरूपता लाने के लिए सरकार ने “भारत” ब्रांड के तहत सभी सब्सिडी वाले उर्वरकों—जैसे यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी—की आपूर्ति शुरू की है। यह कदम किसानों के बीच भ्रम को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक साबित हो रहा है।
उर्वरक वितरण की निगरानी के लिए समेकित उर्वरक निगरानी प्रणाली (IFMS) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे देशभर में उर्वरकों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके। साथ ही, सहकारी समितियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से न केवल यूरिया की उपलब्धता बेहतर होगी, बल्कि लघु और सीमांत किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का यह प्रयास कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

