सहकारिता मंत्रालय द्वारा ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए शुरू की गई “भारत टैक्सी” पहल देश के मोबिलिटी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह भारत का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य ड्राइवरों को सशक्त बनाना और उन्हें आय, स्वामित्व तथा निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देना है।
बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत “भारत टैक्सी” की स्थापना 6 जून 2025 को सहकारिता क्षेत्र के 8 राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की गई थी, जबकि इसका आधिकारिक लॉन्च 5 फरवरी 2026 को किया गया। यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल के मुकाबले एक वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तुत करता है, जिसमें ड्राइवर—जिन्हें ‘सारथी’ कहा गया है—को केंद्र में रखा गया है।
“भारत टैक्सी” की सबसे बड़ी खासियत इसका सब्सक्रिप्शन-आधारित और शून्य-कमीशन मॉडल है। इसमें ड्राइवर ही सहकारी समिति के सदस्य होते हैं, जिससे उनकी आय पर किसी तरह का कमीशन कटौती नहीं होती। साथ ही पारदर्शी किराया प्रणाली और सहकारी शासन व्यवस्था के जरिए उन्हें अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान किया जाता है।
23 मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म से करीब 4.31 लाख ड्राइवर-भागीदार जुड़ चुके हैं। वर्तमान में इसकी सेवाएं दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट तथा सूरत जैसे शहरों में संचालित हो रही हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ और लखनऊ में भी ड्राइवरों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सरकार की योजना अगले तीन वर्षों में “भारत टैक्सी” का विस्तार देशभर के टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ जिला और तहसील स्तर तक करने की है, जिससे ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को भी किफायती और विश्वसनीय परिवहन सुविधा मिल सके।
हालांकि, इस पहल के सामने निजी एग्रीगेटर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और कुछ ड्राइवरों के बीच डिजिटल अपनाने की चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ई-गवर्नेंस टूल्स के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं।
“भारत टैक्सी” का मुख्य लक्ष्य ड्राइवरों को स्थायी आय, सामाजिक सुरक्षा और दीर्घकालिक सशक्तिकरण प्रदान करना है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि देश में एक समावेशी और नागरिक-केंद्रित मोबिलिटी मॉडल को भी स्थापित कर रही है।
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