पंजाब में कृषि सुधार को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य में ‘खेतों से थाली तक’ (या ‘मिट्टी से थाली तक’) नामक नई पहल की शुरुआत की गई है। यह कार्यक्रम पंजाब राज्य खाद्य आयोग और ‘आर ई: जेनरेटिंग पंजाब’ के संयुक्त प्रयास से शुरू हुआ है। इस पहल का मूल उद्देश्य मिट्टी की कमजोरी, भूजल की गिरती उपलब्धता और एकसमान फसल चक्र से पैदा हो रही चुनौतियों का समाधान ढूंढना है, ताकि राज्य की खेती भविष्य के लिए टिकाऊ और लाभकारी बन सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन बाल मुकुंद शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी लगातार अपनी उर्वरता खो रही है और भूजल तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में नई सोच और संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि कृषि व्यवस्था को फिर से मजबूत बनाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान हुए शामिल
सेमिनार की शुरुआत ‘आर ई: जेनरेटिंग पंजाब’ की संस्थापक सुमित संधू ने एजेंडा प्रस्तुत कर की। कार्यक्रम में पंजाब के विशेषज्ञों के साथ-साथ अमेरिका और ब्रिटेन से आए कृषि वैज्ञानिकों तथा लगभग 15 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।
सभी प्रतिभागियों ने मिट्टी स्वास्थ्य, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, जैविक खेती, कार्बन स्तर बढ़ाने, वर्मीकम्पोस्ट, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात जैसे मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए। पूरी चर्चा का आधार श्री गुरु नानक देव जी की सीख — “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” रही, जो पर्यावरण के सम्मान और संतुलन पर जोर देती है।
विशेषज्ञों ने रखे सुझाव
सेमिनार में यूके से आए मुक्ति कुमार ने मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं टाटा ट्रस्ट्स पंजाब के डा. बलजिंदर सिंह सैनी ने मिट्टी को पुनर्जीवित करने के व्यावहारिक तरीके बताए।
इसके अलावा उन्नति कोऑपरेटिव के ज्योति सरूप, वर्मीकम्पोस्ट विशेषज्ञ रजनीश शर्मा, पीएयू के के. बी. सिंह, और पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज के तरुण सेन सहित कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
थिंक एंड डू टैंक का गठन होगा
सेमिनार में यह महत्वपूर्ण घोषणा भी हुई कि जल्द ही एक ‘थिंक एंड डू टैंक’ बनाया जाएगा, जो राज्य की कृषि नीतियों में सुधार और नए प्रायोगिक मॉडल विकसित करने में सहयोग करेगा। यह संस्था वैज्ञानिक सुझावों को नीति स्तर पर लागू करवाने में सहायक होगी।
आयोग के सदस्यों जसवीर सिंह सेखों और चेतन प्रकाश धालीवाल ने इस पहल को पंजाब की कृषि के लिए एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
सरकार तक पहुंचाए जाएंगे सभी सुझाव
समापन में चेयरमैन बाल मुकुंद शर्मा ने भरोसा दिलाया कि सेमिनार में आए सभी सुझावों और तकनीकों को पंजाब सरकार तक पहुंचाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें कृषि नीति का हिस्सा बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस पहल की प्रेरणा उन्हें एम. एस. औजला से मिली, और आने वाले समय में यह पहल पंजाब की खेती को अधिक पर्यावरण-सहायक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

