दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी के सभी सरकारी दफ्तरों में अब हर कर्मचारी की उपस्थिति बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के जरिए दर्ज की जाएगी। इस नियम के तहत वरिष्ठ अधिकारी से लेकर कनिष्ठ कर्मचारियों तक, सभी को समान रूप से इस व्यवस्था का पालन करना होगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरकारी कामकाज में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने साफ किया कि बायोमेट्रिक सिस्टम को सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता से लागू किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दरअसल, लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में समय पर उपस्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई विभागों में कर्मचारियों के देर से आने और समय से पहले जाने की शिकायतें आम रही हैं। ऐसे में यह नया फैसला सरकारी कार्य संस्कृति में सुधार लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से न केवल कर्मचारियों की समयबद्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि इससे कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा। इस प्रणाली के तहत हर कर्मचारी को अपनी उंगलियों के निशान या चेहरे की पहचान के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जिससे किसी भी तरह की फर्जी उपस्थिति की संभावना खत्म हो जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द बायोमेट्रिक मशीनों को अपडेट करें और जहां जरूरत हो, वहां नई मशीनें स्थापित की जाएं। इसके साथ ही आईटी विभाग को भी सिस्टम की निगरानी और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से आम जनता को भी फायदा होगा, क्योंकि समय पर कर्मचारी उपलब्ध रहने से फाइलों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। इससे सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को लेकर अपनी चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि तकनीकी दिक्कतों और मशीनों की खराबी के कारण कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है। इस पर सरकार का कहना है कि शुरुआती दौर में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब देखना होगा कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है और क्या यह सरकारी कामकाज की रफ्तार को वास्तव में तेज कर पाता है।

