देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ा है, जो इस समय कटाई के दौर में थी। इसके अलावा दलहन और सब्जियों की फसलें भी व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल नुकसान को लेकर प्रारंभिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि अब तक करीब 2 लाख 49 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति की रिपोर्ट सामने आई है। उन्होंने भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह आंकड़े शुरुआती हैं और जैसे-जैसे राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आएगी, नुकसान का दायरा और स्पष्ट हो पाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को तत्काल प्रभाव से फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्वे कार्य पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। इसके लिए राजस्व, कृषि और पंचायत/ग्रामीण विकास विभागों को मिलकर संयुक्त सर्वे करने को कहा गया है। साथ ही, क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट समय पर और सटीक तरीके से किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वास्तविक नुकसान का सही आंकलन हो सके।
चौहान ने यह भी कहा कि हर गांव के पंचायत भवन पर नुकसान की सूची चस्पा की जाएगी। इससे किसानों को यह देखने का मौका मिलेगा कि उनके खेत का सही आकलन हुआ है या नहीं। यदि किसी किसान को आपत्ति होती है, तो वह उसमें सुधार के लिए आवेदन कर सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को न्याय दिलाना है।
इस बीच, किसानों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने तैयार फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर गया है। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने उन्हें भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है।
कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रभावित किसानों को हरसंभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां और संबंधित टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं और किसानों को जल्द से जल्द क्लेम का लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौसम की मार अलग-अलग चरणों में पड़ने और लगातार बदलते हालात के कारण अभी कुल अंतिम नुकसान का आंकड़ा बताना संभव नहीं है।
सरकार की ओर से राहत और मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश जारी है, लेकिन किसानों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि उन्हें कब और कितनी राहत मिलती है। फिलहाल, मौसम की इस मार ने देश के अन्नदाताओं के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

