केंद्रीय विद्युत एवं आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने अपनी भूटान यात्रा के दूसरे दिन पुनात्सांगछू-I और पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजनाओं का दौरा कर भारत–भूटान ऊर्जा साझेदारी को और मजबूती प्रदान की। इस दौरान उन्होंने निर्माण और संचालन से जुड़े अहम कार्यों की समीक्षा की और दोनों देशों के सहयोग को सराहा।
पुनात्सांगछू-I परियोजना स्थल पर केंद्रीय मंत्री ने बांध निर्माण के लिए आयोजित कंक्रीट डालने के विशेष समारोह में भाग लिया। यह चरण परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना भारत और Bhutan के बीच सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है, जिसके पूर्ण होने पर भूटान की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
श्री मनोहर लाल ने इस अवसर पर कहा कि भारत और भूटान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी रही है। उन्होंने परियोजना में भारत की वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के इंजीनियरों और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से यह परियोजना सुरक्षित और कुशलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। उन्होंने पावर प्लांट का निरीक्षण कर कार्यान्वयन की प्रगति और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी भी ली।
इसके बाद मंत्री ने पुनात्सांगछू-II परियोजना का भी दौरा किया, जिसका उद्घाटन Narendra Modi और Jigme Khesar Namgyel Wangchuck द्वारा 11 नवंबर 2025 को संयुक्त रूप से किया गया था। यह परियोजना अब भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख स्तंभ बन चुकी है।
मंत्री ने परियोजना के संचालन की समीक्षा करते हुए बताया कि इससे पहले ही पर्याप्त बिजली उत्पादन और राजस्व सृजन शुरू हो चुका है। इसके माध्यम से भारत को स्वच्छ ऊर्जा का निर्यात भी हो रहा है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने परियोजना की संचालन दक्षता की सराहना करते हुए कहा कि यह भूटान के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
दौरे के दौरान मंत्री ने बांध और विद्युत संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण किया और अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने दोहराया कि भारत भूटान के सतत ऊर्जा विकास में हर संभव सहयोग जारी रखेगा और इस साझेदारी को और मजबूत बनाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, श्री मनोहर लाल ने Wangdue Phodrang Dzong का भी दौरा किया, जो भूटान की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है। इस यात्रा ने ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊंचाई दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुनात्सांगछू परियोजनाएं भारत–भूटान संबंधों की आधारशिला हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

