अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। NASA का बहुप्रतीक्षित Artemis II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। चारों अंतरिक्षयात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं। उनका Orion spacecraft 11 अप्रैल की सुबह लगभग 5:37 बजे Pacific Ocean में, San Diego के तट के पास सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन कर गया।
यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है। करीब 54 साल बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा के इतने करीब भेजा गया। इससे पहले 1960-70 के दशक में अपोलो मिशनों के दौरान ही इंसान चंद्रमा तक पहुंचे थे। Artemis II ने एक बार फिर साबित किया कि मानव अंतरिक्ष यात्रा का अगला दौर शुरू हो चुका है।
मिशन के दौरान अंतरिक्षयात्रियों ने चंद्रमा की कक्षा के पास से उड़ान भरी और वहां से कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए। इस यात्रा का मकसद सिर्फ चंद्रमा के चारों ओर घूमना नहीं था, बल्कि भविष्य के मानव मिशनों के लिए तकनीक, सुरक्षा और सिस्टम की जांच करना भी था। खासतौर पर Orion स्पेसक्राफ्ट के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और हीट शील्ड की परफॉर्मेंस पर नजर रखी गई।
स्प्लैशडाउन का पल बेहद रोमांचक रहा। जैसे ही कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, उसकी गति हजारों किलोमीटर प्रति घंटे से घटाकर सुरक्षित स्तर पर लाई गई। इसके बाद पैराशूट खुले और धीरे-धीरे कैप्सूल समुद्र में उतरा। अमेरिकी नौसेना और NASA की रिकवरी टीम पहले से ही मौके पर तैनात थी, जिसने अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
NASA के अधिकारियों के मुताबिक, यह मिशन आने वाले Artemis III मिशन की नींव रखता है, जिसमें इंसानों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है। Artemis कार्यक्रम का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और आगे चलकर मंगल ग्रह की यात्रा की तैयारी करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Artemis II की सफलता ने अंतरिक्ष अन्वेषण के नए दरवाजे खोल दिए हैं। इससे न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में स्पेस टेक्नोलॉजी और रिसर्च को नई दिशा मिलेगी।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें NASA के अगले मिशन पर टिकी हैं। Artemis II ने यह साबित कर दिया है कि इंसान एक बार फिर चंद्रमा की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।

