देशभर में मनाए जा रहे विभिन्न पर्व-त्योहारों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने किसानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसानों का योगदान अतुलनीय है, जो दिन-रात मेहनत कर पूरे देश का भरण-पोषण करते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया, जो जीवन में सकारात्मक संकल्प और मेहनत के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जैसे किसान एक छोटे से बीज को सही समय पर पानी देकर उसे फसल में बदलता है, वैसे ही मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास भी यदि सच्चे और शुद्ध संकल्पों से किए जाएं, तो वे बड़े परिणाम दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित है—
“इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।
पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”
इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि शुद्ध विचारों और दृढ़ निश्चय के साथ किया गया छोटा सा कार्य भी भविष्य में बड़ी सफलता का कारण बनता है। यह संदेश न केवल किसानों के परिश्रम को सम्मान देता है, बल्कि देश के हर नागरिक को प्रेरित करता है कि वे अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास करते रहें।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में लिखा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाए जा रहे त्योहार उमंग और उत्साह से भरे होते हैं। इन खुशियों के पीछे किसानों की कड़ी मेहनत और समर्पण छिपा होता है, जो खेतों में दिन-रात मेहनत कर अन्न उत्पादन करते हैं। उन्होंने किसानों को राष्ट्र की ताकत बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत से ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है और किसान अपनी मेहनत का फल प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे अवसर पर किसानों का मनोबल बढ़ाना और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से सराहना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस तरह के संदेश किसानों के प्रति सम्मान और उनके महत्व को उजागर करते हैं। इससे न केवल किसानों को प्रेरणा मिलती है, बल्कि समाज के अन्य वर्गों में भी उनके प्रति सम्मान की भावना बढ़ती है।
त्योहारों के इस मौसम में प्रधानमंत्री का यह संदेश देशवासियों को यह भी याद दिलाता है कि हर खुशी के पीछे किसी न किसी का परिश्रम होता है, और किसानों का योगदान उसमें सबसे महत्वपूर्ण है। यह सुभाषित और उसका संदेश आने वाले समय में भी लोगों को सकारात्मक सोच और कर्म के प्रति प्रेरित करता रहेगा।

