Ministry of New and Renewable Energy द्वारा आयोजित एक दिवसीय हाइड्रोजन स्टार्टअप प्रदर्शनी में भारत के तेजी से उभरते ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम की झलक देखने को मिली। इस आयोजन का उद्देश्य देश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना था।
प्रदर्शनी में ग्रीन हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला से जुड़े 18 नवोन्मेषी स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जिन्होंने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों और समाधानों का प्रदर्शन किया। इन स्टार्टअप्स ने इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक, ईंधन सेल अनुप्रयोग, बायोमास से हाइड्रोजन उत्पादन और डिजिटल हाइड्रोजन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी Department for Promotion of Industry and Internal Trade के अनुसार, सितंबर 2025 तक देश में हाइड्रोजन क्षेत्र से जुड़े 249 स्टार्टअप सक्रिय थे, जो इस क्षेत्र में बढ़ती रुचि और संभावनाओं को दर्शाता है।
प्रदर्शनी में शामिल स्टार्टअप्स की विविधता भी खास रही। इनमें पांच इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक से जुड़े स्टार्टअप, दो हाइड्रोजन उत्पादन कंपनियां, एक ईंधन सेल स्टार्टअप, एक हाइड्रोजन अनुप्रयोग स्टार्टअप, सुरक्षा से जुड़ा एक एमईएमएस आधारित सेंसर स्टार्टअप, दो ड्रोन स्टार्टअप, तीन हाइड्रोजन कुकिंग समाधान देने वाले स्टार्टअप, एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्टार्टअप और दो जैव-हाइड्रोजन क्षेत्र के स्टार्टअप शामिल थे। यह विविधता हाइड्रोजन वैल्यू चेन के लगभग हर पहलू में हो रहे नवाचार को दर्शाती है।
इस अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार Ajay Sood ने कार्यक्रम में भाग लेकर स्टार्टअप संस्थापकों से संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उनके साथ एमएनआरई के सचिव Santosh Sarangi, पीएसए कार्यालय में वैज्ञानिक सचिव Parminder Maini और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के निदेशक Abhay Bakre भी उपस्थित रहे।
सरकार द्वारा इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का भी इस आयोजन में उल्लेख किया गया। पिछले वर्ष एमएनआरई ने हाइड्रोजन उत्पादन और उसके अनुप्रयोगों के लिए एक विशेष योजना शुरू की थी, जिसके तहत स्टार्टअप्स को पायलट परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ रुपये तक का फंड उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक स्टार्टअप को अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकती है।
इस योजना के तहत National Institute of Solar Energy ने सितंबर 2025 में प्रस्ताव आमंत्रित किए थे, जिसमें कुल 111 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 58 प्रस्तावों को आगे मूल्यांकन के लिए चुना गया, जिनके परिणाम जल्द ही घोषित किए जाने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रदर्शनी न केवल स्टार्टअप्स को मंच प्रदान करती है, बल्कि सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को भी मजबूत करती है। यह पहल भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिलाकर, एमएनआरई की यह प्रदर्शनी भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की एक सशक्त झलक पेश करती है, जहां नवाचार, तकनीक और उद्यमिता मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।

