औषधीय विज्ञान के क्षेत्र में उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए National Institute of Pharmaceutical Education and Research Mohali ने Novartis Healthcare Private Limited के साथ एक अहम अनुदान समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता “फैकल्टी रिसर्च डेवलपमेंट पायनियर ग्रांट” के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है।
इस समझौते पर हस्ताक्षर नई दिल्ली में Department of Pharmaceuticals के सचिव Manoj Joshi की उपस्थिति में किए गए। यह पहल औषधि क्षेत्र में अकादमिक और उद्योग के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस सहयोग के तहत, नाईपर मोहाली के एक संकाय सदस्य को नोवार्टिस द्वारा समर्थित प्रतिष्ठित “डेवलपमेंट पायनियर ग्रांट” के लिए चुना गया है। इस अनुदान का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा देना और ऐसे नवाचारों को प्रोत्साहित करना है, जो उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों। इससे न केवल अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि इसका सीधा लाभ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को भी मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मनोज जोशी ने कहा कि इस प्रकार के सहयोग से शोधकर्ताओं की कार्यक्षमता और उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए, ताकि उसका व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
“डेवलपमेंट पायनियर ग्रांट” एक प्रतिस्पर्धी मंच है, जिसमें देशभर के सभी सात नाईपर संस्थानों के संकाय सदस्यों को अपने अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इस वर्ष इस ग्रांट के लिए कुल 42 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनका स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति द्वारा गहन मूल्यांकन किया गया। इसके बाद नाईपर मोहाली के एक संकाय सदस्य को इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चयनित किया गया।
इस पहल को औषधि विभाग के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना, अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करना और भारत को वैश्विक स्तर पर औषधीय नवाचार का केंद्र बनाना है।
समारोह में Dulal Panda, Joydev Kumar Laha, Amitabh Dubey और Sadhana Joglekar सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस साझेदारी को औषधीय अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर को नई दिशा देंगी और अनुसंधान एवं विकास को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। नाईपर और नोवार्टिस के बीच यह सहयोग न केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा, बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार लाने में सहायक साबित होगा।

