पंजाब के किसानों के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने हाल ही में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए 123.28 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा पैकेज मंजूर किया है। यह घोषणा प्रदेश के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बुधवार को की। इस फैसले से हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसलें पिछले महीने प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गई थीं।
सरकार की ओर से यह राहत पैकेज जिला प्रशासन द्वारा किए गए जमीनी आकलन यानी गिरदावरी के आधार पर तय किया गया है। मंत्री ने बताया कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा वितरित किया जाएगा, ताकि वे नुकसान से उबर सकें और आगामी कृषि गतिविधियों के लिए खुद को तैयार कर सकें। खासतौर पर गेहूं की फसल को हुए नुकसान ने किसानों की आर्थिक स्थिति को काफी प्रभावित किया है।
आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब के सात जिलों के 111 गांवों में कुल 92,695 एकड़ कृषि भूमि पर फसलें प्रभावित हुई हैं। इसमें 992 एकड़ जमीन पर 26% से 32% तक, 61,115 एकड़ पर 33% से 75% तक और 30,588 एकड़ जमीन पर 76% से 100% तक नुकसान दर्ज किया गया है। कई इलाकों में तो पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया।
जिलावार मुआवजे की बात करें तो फाजिल्का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा है, जहां के किसानों के लिए 44.24 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया है। इसके अलावा श्री मुक्तसर साहिब को 43.01 करोड़ रुपये, बठिंडा को 22.83 करोड़ रुपये, मोगा को 7.73 करोड़ रुपये और अमृतसर को 5.26 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं फिरोजपुर और रूपनगर जिलों के लिए क्रमशः लगभग 17.10 लाख और 1.35 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है।
मंत्री मुंडियां ने कहा कि मुआवजा राशि नुकसान की गंभीरता के आधार पर तय की गई है, ताकि हर किसान को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से राहत मिल सके। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और किसी को भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल की शुरुआत में पंजाब के कई हिस्सों में ओलावृष्टि और तेज बारिश हुई थी, जिससे खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ। अनुमान है कि पूरे राज्य में करीब 1.3 लाख एकड़ जमीन पर फसलें प्रभावित हुई थीं। इससे सरकारी खरीद प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है, क्योंकि खराब गुणवत्ता के कारण किसानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहे थे।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से गेहूं खरीद के नियमों में ढील देने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए गेहूं की चमक और दानों के नुकसान से जुड़े मानकों में राहत दी है। पंजाब में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद भी शुरू हो चुकी है, जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिल रही है।
कुल मिलाकर, यह राहत पैकेज किसानों के लिए मुश्किल समय में एक बड़ी मदद साबित हो सकता है और उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


