झारखंड के खूंटी जिले से महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि का एक प्रेरणादायक मॉडल सामने आया है, जहां महिलाओं के नेतृत्व में संचालित एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। Ministry of Agriculture & Farmers Welfare की पहल और NITI Aayog के सहयोग से यहां “झारिया महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड” ने एक बायो-रिसोर्स सेंटर (BRC) की स्थापना की है।
इस महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ में 1004 सदस्य किसान जुड़े हुए हैं, जो अब रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। बायो-रिसोर्स सेंटर की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैविक इनपुट्स जैसे जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक और अन्य प्राकृतिक उत्पाद आसानी से उपलब्ध कराना है।
इस पहल के तहत किसान अब अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विकल्पों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम हो रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बायो-रिसोर्स सेंटर के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे वे प्राकृतिक खेती की तकनीकों को बेहतर तरीके से समझ सकें और अपनाएं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है, जिन्होंने न केवल संगठन को मजबूत किया है बल्कि गांव स्तर पर जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मॉडल देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बेहद प्रभावी साबित हो सकते हैं। महिला एफपीओ द्वारा संचालित यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही है।
इस पहल के जरिए किसानों को बाजार में जैविक उत्पादों के बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं में केमिकल-फ्री उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ इन किसानों को मिल सकता है।
सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत ऐसे बायो-रिसोर्स सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र किसानों के लिए एक “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में काम करते हैं, जहां उन्हें आवश्यक संसाधन, जानकारी और तकनीकी सहायता एक ही स्थान पर मिल जाती है।
इस पहल से यह भी स्पष्ट होता है कि जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। खूंटी का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
कुल मिलाकर, झारखंड के खूंटी जिले में महिला किसानों द्वारा संचालित यह बायो-रिसोर्स सेंटर प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में कृषि के स्वरूप को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


