देश में अब किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ प्राकृतिक और जैविक तरीकों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर आम की खेती में बिना केमिकल के उत्पादन को लेकर किसानों में रुचि बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केमिकल फ्री आम की खेती न सिर्फ मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाती है, बल्कि बाजार में इसके अच्छे दाम भी मिलते हैं।
बिना केमिकल आम की खेती करने के लिए सबसे पहले जमीन की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। किसान को जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और पेड़ स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा, खेत में नियमित रूप से जैविक घोल जैसे जीवामृत और घनजीवामृत का छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।
कीट और रोग नियंत्रण के लिए केमिकल की जगह प्राकृतिक उपाय अपनाना जरूरी है। किसान नीम के तेल, लहसुन-अदरक के घोल और गोमूत्र आधारित कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं। ये उपाय फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करते हैं और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा, खेत में पक्षियों और लाभकारी कीटों को आकर्षित करने के लिए पेड़ों के आसपास विविध पौधे लगाने से भी मदद मिलती है।
सिंचाई प्रबंधन भी बिना केमिकल खेती में अहम भूमिका निभाता है। ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों का उपयोग कर पानी की बचत की जा सकती है और पौधों को आवश्यक नमी भी मिलती रहती है। साथ ही, मल्चिंग तकनीक अपनाकर मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक खेती में शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन कुछ समय बाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ने से उत्पादन स्थिर और बेहतर हो जाता है। इसके अलावा, जैविक आम की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत किसानों को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जाती है। ऐसे में किसान अगर सही जानकारी और तकनीक के साथ बिना केमिकल आम की खेती करते हैं, तो यह उनके लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, बिना केमिकल आम की खेती पर्यावरण के अनुकूल, कम लागत वाली और लंबे समय में अधिक लाभ देने वाली खेती पद्धति है। किसानों को चाहिए कि वे धीरे-धीरे इस दिशा में कदम बढ़ाएं और टिकाऊ खेती को अपनाएं।
