जहां भीषण गर्मी में पारंपरिक खेती करना चुनौती बन जाता है, वहीं जमुई जिले के एक युवा किसान ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। खैरा प्रखंड के नवडीहा गांव निवासी शिवेंदु कुमार ने नौकरी छोड़कर मशरूम खेती अपनाई और आज ऑयस्टर मशरूम उत्पादन से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
पढ़ाई से खेती तक का सफर
शिवेंदु ने कृषि विषय में स्नातक करने के बाद नौकरी शुरू की, लेकिन उनका मन खेती में ही रमा रहा। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और गांव लौटकर मशरूम उत्पादन शुरू किया। परिवार, खासकर पत्नी के सहयोग ने इस फैसले को मजबूती दी।
छोटे स्तर से बड़ी शुरुआत
- शुरुआत: 100 बैग से उत्पादन
- वर्तमान: 700 बैग में खेती
- प्रति बैग उत्पादन: लगभग 15 किलो तक
- तैयार होने का समय: 15–20 दिन
आज शिवेंदु का मशरूम स्थानीय बाजार में आसानी से बिक जाता है और उन्हें अलग से मार्केटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती।
गर्मी में उत्पादन कैसे संभव हुआ?
ऑयस्टर मशरूम आमतौर पर ठंडे तापमान (करीब 15°C) में अच्छी तरह उगता है। लेकिन शिवेंदु ने गर्मी (40°C) में भी इसे उगाने के लिए खास तकनीक अपनाई:
- डबल लेयर ग्रीन हाउस का निर्माण
- चारों ओर जूट (बोरे) का इस्तेमाल
- दिन में 4–5 बार पानी का छिड़काव
- अंदर नमी और तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था
इन उपायों से उन्होंने अंदर का तापमान नियंत्रित रखा और सफल उत्पादन किया।
अच्छी कीमत, बेहतर मुनाफा
- ऑयस्टर मशरूम की कीमत: ₹200–₹250 प्रति किलो
- बाजार में उपलब्धता कम, मांग ज्यादा
- सीधे घर से बिक्री, ट्रांसपोर्ट का खर्च नहीं
इससे उनकी आमदनी स्थिर और बेहतर बनी हुई है।
परिवार बना ताकत
शिवेंदु के पिता, जो स्वयं किसान हैं, इस काम में उनका हाथ बंटाते हैं। परिवार के सहयोग ने इस उद्यम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे की योजना
शिवेंदु अब मशरूम उत्पादन को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य है:
- उत्पादन बढ़ाना
- नई तकनीकों को अपनाना
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना
क्यों खास है यह मॉडल?
- कम जगह में ज्यादा उत्पादन
- सालभर खेती संभव
- कम लागत में ज्यादा मुनाफा
- युवाओं के लिए रोजगार का अच्छा विकल्प
शिवेंदु की कहानी बताती है कि अगर सही तकनीक और सोच के साथ खेती की जाए, तो कठिन मौसम भी बाधा नहीं बनता। मशरूम जैसी हाई-वैल्यू फसलें आज के युवाओं के लिए खेती में नए अवसर खोल रही हैं।

