Punjab Agricultural University (पीएयू) के कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस के तहत चल रहे All India Coordinated Research Project-Women in Agriculture (AICRP-WIA) ने अप्रैल 2026 के दौरान लुधियाना जिले के हलवारा, अकालगढ़, बोपाराई कलां, पुरैन और कुल्लेवाल गांवों में ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य गर्मी के मौसम में स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देना था।
इन कार्यक्रमों में महिलाओं को तरबूज-पुदीना कूलर, शहतूत जूस, बेल का शरबत, चना सत्तू और नींबू पानी जैसे पौष्टिक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थ बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
AICRP-WIA की यूनिट कोऑर्डिनेटर डॉ. रितु मित्तल गुप्ता ने बताया कि मौजूदा गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ये प्रशिक्षण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल से पौष्टिक पेय तैयार करने पर केंद्रित थे, ताकि ग्रामीण परिवार आसानी से इन्हें अपनाकर स्वास्थ्य लाभ ले सकें।
डॉ. रेनुका अग्रवाल और डॉ. शिवानी राणा ने बताया कि ऐसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखने, लू से बचाव करने और पोषण स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को शैक्षणिक सामग्री और बीज किट भी वितरित किए गए।
डॉ. प्राची बिष्ट और डॉ. प्रेरणा कपिला ने किचन गार्डनिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से यह पहल लगातार जारी है, जिसके तहत मौसमी सब्जियों के बीज वितरित कर घर-घर पोषण सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण सत्रों में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सरल, कम लागत वाले पेय पदार्थ बनाने की विधियां सीखीं। युवा विशेषज्ञ डॉ. शिखा शर्मा और डॉ. अर्चना तेवारी ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हुए विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इस पहल के माध्यम से AICRP-WIA ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, आजीविका सुदृढ़ीकरण और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
पीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ. अजरमेर सिंह ढट्ट, कॉलेज की डीन डॉ. किरण बैंस और अनुसंधान समन्वयक डॉ. दीपिका विग ने इस पहल की सराहना की। वहीं, गांवों के सरपंचों ने भी AICRP टीम के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया और महिलाओं की उत्साही भागीदारी की प्रशंसा की।
