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बढ़ सकता है सरकार का फूड सब्सिडी बिल, FY27 में 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का अनुमान

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) यानी मुफ्त राशन योजना पर वास्तविक खर्च FY27 में 2.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकता है, खासकर तब जब केंद्रीय पूल में अनाज का स्टॉक लगातार बढ़ता रहा

Vipin Mishra by Vipin Mishra
May 8, 2026
in अन्य
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बढ़ सकता है सरकार का फूड सब्सिडी बिल, FY27 में 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का अनुमान
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देश में चावल और गेहूं के बढ़ते सरकारी स्टॉक, मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) में लगातार बढ़ोतरी और भंडारण लागत बढ़ने से केंद्र सरकार का फूड सब्सिडी बिल FY27 में बजट अनुमान से काफी ऊपर जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का खाद्य सब्सिडी खर्च 2.27 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से कम से कम 20,000 करोड़ रुपये अधिक हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) यानी मुफ्त राशन योजना पर वास्तविक खर्च FY27 में 2.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकता है, खासकर तब जब केंद्रीय पूल में अनाज का स्टॉक लगातार बढ़ता रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि चावल और गेहूं के बड़े स्टॉक को रखने की लागत तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही चावल, गेहूं और मोटे अनाज के MSP में 7% से 8% तक की बढ़ोतरी, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और अन्य आकस्मिक खर्च भी सरकार के बोझ को बढ़ा रहे हैं।

फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में चावल की आर्थिक लागत 42.11 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 43.91 रुपये प्रति किलो और गेहूं की लागत 29.68 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 31.45 रुपये प्रति किलो हो सकती है। इस लागत में MSP, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और कैरीइंग कॉस्ट शामिल हैं।

1 मई 2026 तक FCI के पास कुल 77.27 मिलियन टन अनाज का स्टॉक था, जिसमें 38.95 मिलियन टन चावल और 38.3 मिलियन टन गेहूं शामिल है। यह मात्रा तय बफर मानक 21.04 मिलियन टन से काफी अधिक है। इसमें मिलर्स से मिलने वाला लगभग 30 मिलियन टन चावल शामिल नहीं है।

हर साल सरकार PMGKAY के तहत करीब 810 मिलियन लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराती है। इसके लिए लगभग 36-38 मिलियन टन चावल और 18-20 मिलियन टन गेहूं की जरूरत होती है।

सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में गेहूं की खरीद जून तक जारी रहेगी, जिससे सरकारी स्टॉक और बढ़ सकता है। पिछले कई वर्षों से किसानों से MSP पर 75 से 80 मिलियन टन तक अनाज की खरीद हो रही है, जबकि बाजार में इसकी निकासी सीमित रहने से गोदामों में अतिरिक्त स्टॉक जमा होता जा रहा है।

FY26 में FCI ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत रिकॉर्ड 10 मिलियन टन चावल बेचा, लेकिन गेहूं की बिक्री केवल 0.6 मिलियन टन रही। इसके बावजूद सरकारी गोदामों में अनाज का दबाव बना हुआ है।

फूड मिनिस्ट्री का मानना है कि MSP में हर साल 3% से 7% तक की बढ़ोतरी और किसानों से ओपन-एंडेड खरीद नीति के कारण चावल और गेहूं का सरप्लस स्टॉक लगातार बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि कोविड काल में शुरू की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) से मिलने वाले राशन के अतिरिक्त प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज देना शुरू किया था। बाद में सरकार ने इस मुफ्त राशन योजना को 2028 तक बढ़ा दिया, जिससे सरकारी खजाने पर लगभग 11.8 ट्रिलियन रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।

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