PM Kusum Yojana 2.0: देश में खेती को सस्ता, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. किसानों को डीजल पंपों की झंझट और बढ़ते ईंधन खर्च से राहत दिलाने के लिए सरकार जल्द ही पीएम-कुसुम 2.0 योजना लॉन्च कर सकती है. इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य खेतों में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था को बढ़ावा देना और किसानों की लागत को कम करना है.
सरकार का मानना है कि डीजल पंप न केवल किसानों की जेब पर भारी पड़ते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं. डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण सिंचाई की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की आमदनी प्रभावित होती है. ऐसे में पीएम-कुसुम 2.0 योजना किसानों के लिए राहत का बड़ा जरिया बन सकती है.
योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी. खास बात यह है कि इस योजना में छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष फोकस रहेगा. सरकार सब्सिडी के जरिए किसानों को कम लागत में सोलर पंप उपलब्ध कराएगी, जिससे उन्हें लंबे समय तक मुफ्त बिजली जैसी सुविधा मिल सकेगी. इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के कई राज्यों में अभी भी बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भर हैं. इससे हर साल करोड़ों लीटर डीजल की खपत होती है. यदि सोलर पंपों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इससे ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा. यही वजह है कि सरकार अब कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है.
पीएम-कुसुम योजना के पहले चरण में भी किसानों को सोलर पंप लगाने और खेतों में सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए सहायता दी गई थी. अब पीएम-कुसुम 2.0 में तकनीक को और बेहतर बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि नई योजना में किसानों को स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम, ज्यादा क्षमता वाले सोलर पंप और आसान फाइनेंसिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं.
इस योजना (PM Kusum Yojana 2.0) का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट की समस्या कम होगी. जिन इलाकों में बिजली की सप्लाई कमजोर रहती है, वहां सोलर पंप किसानों के लिए भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं. किसान दिन के समय आसानी से सिंचाई कर सकेंगे और फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में खेती से डीजल पंपों की विदाई लगभग तय हो सकती है. इससे खेती आधुनिक और टिकाऊ बनेगी. साथ ही किसानों की निर्भरता पारंपरिक ईंधन पर कम होगी.
सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर और ऊर्जा सुरक्षित कृषि व्यवस्था की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है. अब किसानों को उम्मीद है कि पीएम-कुसुम 2.0 योजना जल्द जमीन पर उतरेगी और उन्हें महंगे डीजल से राहत मिलेगी.

