भारत में वन्यजीव संरक्षण को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि बिग कैट यानी बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और वित्तीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उद्योग जगत से प्राकृतिक वास पुनर्स्थापन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और सामुदायिक संरक्षण कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
श्री यादव भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित “वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और समाज का भविष्य तथा विजन फॉर इंडिया@100” विषयक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि भारत आगामी 1 और 2 जून 2026 को नई दिल्ली में पहले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह आयोजन वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों—बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जगुआर और प्यूमा—का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि यह अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है और इसका मुख्यालय भारत में स्थापित किया गया है, जो देश की वन्यजीव संरक्षण प्रतिबद्धता को मजबूत बनाता है।
श्री यादव ने कहा कि बिग कैट केवल वन्यजीव नहीं हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं। ये बड़े शिकारी जंगलों की जैव विविधता को बनाए रखने, जल स्रोतों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम इन प्रजातियों का भविष्य सुरक्षित करते हैं, तो वास्तव में हम मानवता और पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित कर रहे होते हैं।
उन्होंने उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट वित्तपोषण के माध्यम से बिग कैट संरक्षण को नई गति दी जा सकती है। प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, वन्यजीव सर्वेक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता अभियानों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय उद्योग परिसंघ और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस के बीच पहले से समझौता ज्ञापन (MoU) मौजूद है, जो इस दिशा में सहयोग को और मजबूत करेगा।
अपने संबोधन में श्री यादव ने भारत की विकास यात्रा और “इंडिया@100” विजन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय केवल परिवर्तन का दौर नहीं बल्कि “युग परिवर्तन” का समय है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव दुनिया की दिशा तय कर रहे हैं और भारत इन चुनौतियों के बीच वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत नवाचार, आर्थिक मजबूती, सामाजिक समावेशिता और सतत विकास के आधार पर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और विनिर्माण क्षेत्र में भारत वैश्विक परिवर्तन का प्रमुख भागीदार बन चुका है।
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत अब दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। मार्च 2026 तक देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 150 गीगावाट तक पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2014 में यह केवल 2.82 गीगावाट थी। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 के लिए निर्धारित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लिया है और वर्तमान में देश की लगभग 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त हो रही है।
जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि देश ने 2005 से 2020 के बीच सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क और पेरिस समझौते के तहत अपनी पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट भी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी हासिल करते हुए प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को नियंत्रित रखा है और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले पूरा किया है।
इंडिया@100 विजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए श्री यादव ने कहा कि आर्थिक परिवर्तन, मानव पूंजी विकास, कौशल उन्नयन, सतत विकास, सामाजिक समावेशिता और वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत भूमिका—ये सभी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला होंगे। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक महाशक्ति बनना नहीं, बल्कि एक समावेशी, नवोन्मेषी, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राष्ट्र बनना है, जो विश्व शांति और समृद्धि में सार्थक योगदान दे सके।

