ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। 08 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार देश में ग्रीष्मकालीन फसलों के तहत कुल बोया गया क्षेत्र 83.08 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 80.01 लाख हेक्टेयर की तुलना में 3.07 लाख हेक्टेयर अधिक है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी देश में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में मदद करेगी। विशेष रूप से मक्का, दलहन और तिलहन फसलों के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा, बेहतर मौसम, उन्नत बीज, सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों ने भी इस बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 की पूरी रिपोर्ट
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ग्रीष्मकालीन फसलों के कुल क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है। हालांकि कुछ फसलों में कमी भी दर्ज की गई है।
ग्रीष्मकालीन फसलों का कुल क्षेत्रफल
| फसल | चालू वर्ष 2026 | पिछले वर्ष 2025 | बढ़ोतरी/कमी |
| चावल | 31.05 | 32.42 | -1.36 |
| दलहन | 24.97 | 23.76 | +1.21 |
| श्री अन्न व मोटे अनाज | 16.01 | 14.25 | +1.77 |
| तिलहन | 11.04 | 9.58 | +1.47 |
| कुल | 83.08 | 80.01 | +3.07 |
स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में कुल मिलाकर अच्छी वृद्धि दर्ज हुई है।
चावल के क्षेत्रफल में आई गिरावट
देश में चावल का क्षेत्रफल इस वर्ष कुछ कम हुआ है। आंकड़ों के अनुसार 2026 में चावल का बोया गया क्षेत्र 31.05 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 32.42 लाख हेक्टेयर था।
चावल क्षेत्रफल घटने के प्रमुख कारण
- पानी की कमी
- मौसम में बदलाव
- वैकल्पिक फसलों की ओर किसानों का झुकाव
- बढ़ती लागत
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सिंचाई तकनीक और जल प्रबंधन से आने वाले समय में स्थिति बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा, कई राज्यों में किसान अब कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दलहन क्षेत्र में बढ़ी किसानों की रुचि
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में दलहन फसलों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ष दलहन का कुल क्षेत्रफल 24.97 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष 23.76 लाख हेक्टेयर था।
दलहन फसलों का आंकड़ा
| दलहन फसल | 2026 | 2025 | अंतर |
| हरा चना | 20.07 | 20.00 | +0.07 |
| काला चना | 4.60 | 3.58 | +1.02 |
| अन्य दलहन | 0.30 | 0.19 | +0.11 |
विशेष रूप से काला चना के क्षेत्रफल में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दलहन क्षेत्र बढ़ने के फायदे
- मिट्टी में नाइट्रोजन संतुलन
- कम लागत वाली खेती
- किसानों को बेहतर बाजार मूल्य
- पोषण सुरक्षा में सुधार
इसके अलावा, सरकार भी दलहन उत्पादन बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है।
श्री अन्न और मोटे अनाज की खेती में तेजी
पिछले कुछ वर्षों में श्री अन्न यानी मिलेट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में मोटे अनाज का क्षेत्रफल 16.01 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
यह पिछले वर्ष की तुलना में 1.77 लाख हेक्टेयर अधिक है।
मोटे अनाज का क्षेत्रफल
| फसल | 2026 | 2025 | अंतर |
| ज्वार | 0.37 | 0.36 | +0.01 |
| बाजरा | 5.40 | 5.20 | +0.20 |
| रागी | 0.22 | 0.16 | +0.06 |
| मक्का | 10.00 | 8.50 | +1.50 |
मक्का फसल में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।
मक्का की खेती क्यों बढ़ रही है?
मक्का आज केवल खाद्यान्न फसल नहीं रह गई है। इसका उपयोग अब पशु चारा, स्टार्च उद्योग, इथेनॉल उत्पादन और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री में भी बढ़ रहा है।
मक्का क्षेत्र बढ़ने के प्रमुख कारण
- अधिक लाभकारी फसल
- कम अवधि में तैयार
- उद्योगों में बढ़ती मांग
- सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं
इसके अलावा, आधुनिक बीजों ने भी मक्का उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाया है।
तिलहन क्षेत्र में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में तिलहन फसलों के क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि दर्ज हुई है। इस वर्ष कुल तिलहन क्षेत्र 11.04 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 9.58 लाख हेक्टेयर था।
तिलहन फसलों का आंकड़ा
| तिलहन फसल | 2026 | 2025 | अंतर |
| मूंगफली | 5.51 | 4.20 | +1.31 |
| सूरजमुखी | 0.39 | 0.35 | +0.04 |
| तिल | 5.07 | 4.96 | +0.11 |
मूंगफली के क्षेत्रफल में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है।
तिलहन उत्पादन क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत खाद्य तेलों के आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में तिलहन क्षेत्र बढ़ना देश की आत्मनिर्भरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, तिलहन फसलें किसानों के लिए लाभदायक विकल्प भी बन रही हैं।
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 बढ़ने के प्रमुख कारण
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष क्षेत्रफल बढ़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं।
- बेहतर मानसून की उम्मीद
किसानों को इस वर्ष अच्छे मानसून की उम्मीद है। इसलिए उन्होंने अधिक क्षेत्र में बुवाई की है।
- सरकारी योजनाओं का असर
सरकार द्वारा बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों पर दी जा रही सहायता का सकारात्मक असर देखने को मिला है।
- आधुनिक कृषि तकनीक
ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई और उन्नत बीजों ने खेती को आसान और लाभकारी बनाया है।
- बाजार में बेहतर कीमत
कई फसलों के अच्छे दाम मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा है।
किसानों के लिए क्या हैं इसके फायदे?
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 में बढ़ोतरी किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
किसानों को मिलने वाले लाभ
- अधिक उत्पादन
- बेहतर आय
- फसल विविधीकरण
- रोजगार के अवसर
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
इसके अलावा, बढ़ता उत्पादन खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
कृषि क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका
आज कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिक हो रहा है। किसान अब नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।
नई कृषि तकनीकें
- ड्रोन स्प्रेइंग
- स्मार्ट सिंचाई
- मौसम आधारित खेती
- मिट्टी परीक्षण
- Precision Farming
इन तकनीकों से उत्पादन लागत कम होती है और पैदावार बढ़ती है।
जलवायु परिवर्तन का खेती पर प्रभाव
हालांकि कृषि क्षेत्र अभी भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और पानी की कमी कई क्षेत्रों में खेती को प्रभावित कर रहे हैं।
समाधान
- सूखा सहनशील बीज
- जल संरक्षण तकनीक
- संतुलित उर्वरक उपयोग
- फसल विविधीकरण
इसलिए टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है।
आने वाले समय में कैसी रहेगी स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और सरकारी सहायता जारी रही, तो आने वाले महीनों में उत्पादन और बेहतर हो सकता है।
इसके अलावा, श्री अन्न, दलहन और तिलहन फसलों में बढ़ती रुचि भारत की कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकती है।
ग्रीष्मकालीन फसल क्षेत्रफल 2026 के ताजा आंकड़े भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। कुल क्षेत्रफल में 3.07 लाख हेक्टेयर की वृद्धि यह दिखाती है कि किसान अब आधुनिक खेती और विविध फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
हालांकि चावल के क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, लेकिन दलहन, मक्का और तिलहन जैसी फसलों में वृद्धि कृषि क्षेत्र को नई मजबूती दे सकती है।
Overall, यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ खेती को बढ़ावा दें, तो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है।

