विज्ञान टेक 2026 का आयोजन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर बीआरआईसी-एनआईआई, नई दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचार क्षमता और तकनीकी विकास को बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। इसके परिणामस्वरूप भारत आज वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में तेजी से मजबूत स्थान बना रहा है।
इसके अलावा, कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थान NIFTEM-कुंडली ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों से सभी का ध्यान आकर्षित किया।
विज्ञान टेक 2026 में भारत के स्टार्टअप और इनोवेशन की बड़ी छलांग
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भारत में केवल 350–400 स्टार्टअप थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 2 लाख से अधिक हो चुकी है।
भारत की बड़ी उपलब्धियां
- दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
- ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में रैंक 80 से बढ़कर 38
- पेटेंट फाइलिंग में विश्व में छठा स्थान
- हर साल 1 लाख से अधिक पेटेंट आवेदन
- 55% से अधिक पेटेंट भारतीय नागरिकों द्वारा फाइल
इसके अलावा, भारत उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध और नवाचार आधारित अनुसंधान में भी वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है।
विज्ञान टेक 2026 में पहली बार 14 मंत्रालय एक मंच पर
विज्ञान टेक 2026 की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार 14 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विभाग एक मंच पर एकत्र हुए।
इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों ने अपनी स्वदेशी तकनीकों, शोध परियोजनाओं और वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियां
- टेक-संग्रह का विमोचन
- तकनीकी प्रदर्शनी
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते
- मंत्रालयों के बीच सहयोगात्मक पहल
- नवाचार आधारित समाधान प्रदर्शन
इसके अलावा, कार्यक्रम का मुख्य विषय “विकसित भारत के लिए भारत के नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण” रखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश भी साझा किया गया।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए भारत के मजबूत होते नवाचार इकोसिस्टम की सराहना की।
उन्होंने बहु-मंत्रालयी सहयोग को भारत के वैज्ञानिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में विज्ञान और तकनीक की भूमिका पर भी जोर दिया।
NIFTEM-कुंडली ने विज्ञान टेक 2026 में बटोरी सुर्खियां
विज्ञान टेक 2026 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के प्रमुख संस्थान NIFTEM-कुंडली ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों से सभी को प्रभावित किया।
डॉ. एच. एस. ओबेरॉय के नेतृत्व में संस्थान ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कई नई तकनीकों को प्रस्तुत किया।
टेक-संग्रह में शामिल हुईं 23 तकनीकें
कार्यक्रम में जारी “विज्ञान संग्रह” नामक तकनीकी संकलन में कुल 293 तकनीकों को शामिल किया गया।
इनमें से 23 तकनीकें केवल NIFTEM-कुंडली की थीं। यह संस्थान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
विज्ञान टेक 2026 में NIFTEM की प्रमुख तकनीकें
- हाइब्रिड ड्रायर टेक्नोलॉजी
NIFTEM-कुंडली ने ऊर्जा कुशल खाद्य प्रसंस्करण के लिए नई ड्रायर तकनीकों को प्रस्तुत किया।
प्रमुख तकनीकें
- इवैक्यूएटेड ट्यूब सोलर हाइब्रिड ड्रायर
- हाइब्रिड ग्रीनहाउस सोलर ड्रायर
इन तकनीकों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित खाद्य सुखाने की प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, ये तकनीकें किसानों और खाद्य उद्योग दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
- प्रोटीन और फाइबर युक्त ग्रेनोला बार तकनीक
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को देखते हुए NIFTEM ने उच्च पोषण वाले ग्रेनोला बार विकसित किए हैं।
इस तकनीक की विशेषताएं
- उच्च प्रोटीन
- अधिक फाइबर
- Ready-to-Eat उत्पाद
- हेल्थ मार्केट के लिए उपयुक्त
इसके अलावा, यह तकनीक हेल्दी स्नैक उद्योग को नई दिशा दे सकती है।
- बाजरा और मल्टीग्रेन आधारित एक्सट्रूडेड उत्पाद
NIFTEM-कुंडली ने श्री अन्न और पारंपरिक अनाजों के मूल्यवर्धन पर भी जोर दिया।
विकसित उत्पाद
- बाजरा पफ
- दाल पफ
- मल्टीग्रेन पफ
- शकरकंद पफ
- नाचोस
इसके अलावा, ये उत्पाद भारत में मिलेट आधारित फूड इंडस्ट्री को मजबूत कर सकते हैं।
त्वरित मिलावट जांच तकनीकों ने खींचा ध्यान
विज्ञान टेक 2026 में प्रदर्शित सबसे आकर्षक तकनीकों में मिलावट और संदूषण की पहचान करने वाली त्वरित किट शामिल रहीं।
प्रमुख परीक्षण तकनीकें
- पानी में मिलावट जांच
- चाय की पत्तियों की गुणवत्ता जांच
- पनीर में मिलावट पहचान
- कैल्शियम कार्बाइड से पकाए गए फलों की जांच
इन तकनीकों ने वैज्ञानिकों, अधिकारियों और आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
प्रोबायोटिक और हेल्थ फूड तकनीकों की बढ़ती मांग
कार्यक्रम में प्रोबायोटिक और हेल्थ फूड आधारित उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया।
प्रमुख उत्पाद
- प्रोबायोटिक कांजी पाउडर
- ग्लूटेन-फ्री उत्पाद
- शहद और घी पाउडर
- विटामिन-D युक्त मशरूम आटा
इसके अलावा, ये उत्पाद स्वास्थ्य-केंद्रित खाद्य बाजार में नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।
विज्ञान टेक 2026 क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों के अनुसार विज्ञान टेक 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि भारत के वैज्ञानिक भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच है।
कार्यक्रम के बड़े उद्देश्य
- वैज्ञानिक सहयोग मजबूत करना
- स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना
- स्टार्टअप्स को समर्थन देना
- उद्योग और शोध संस्थानों को जोड़ना
- विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूत करना
इसके अलावा, यह कार्यक्रम युवाओं को विज्ञान और नवाचार के प्रति प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत का विज्ञान और तकनीक क्षेत्र कैसे बदल रहा है?
भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवाचार केंद्रों में शामिल हो चुका है।
तेजी से बढ़ते क्षेत्र
- Artificial Intelligence
- Biotechnology
- Food Processing
- Space Technology
- Renewable Energy
इसके अलावा, सरकार लगातार रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित कर रही है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में क्यों बढ़ रहा है निवेश?
खाद्य प्रसंस्करण भारत की अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ता क्षेत्र बन चुका है।
प्रमुख कारण
- बढ़ती आबादी
- हेल्दी फूड की मांग
- निर्यात के अवसर
- वैल्यू एडिशन
- किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता
इसके परिणामस्वरूप NIFTEM जैसे संस्थान भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई दिशा दे रहे हैं।
विकसित भारत 2047 में विज्ञान की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत का सपना विज्ञान और तकनीक के बिना पूरा नहीं हो सकता।
जरूरी क्षेत्र
- कृषि तकनीक
- स्वास्थ्य तकनीक
- स्वच्छ ऊर्जा
- खाद्य सुरक्षा
- जलवायु समाधान
इसलिए विज्ञान टेक 2026 जैसे आयोजन भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
विज्ञान टेक 2026 ने यह साबित कर दिया कि भारत विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।
NIFTEM-कुंडली द्वारा प्रस्तुत खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों, मिलेट आधारित उत्पादों और हेल्थ फूड नवाचारों ने यह दिखाया कि भारत केवल तकनीक विकसित नहीं कर रहा, बल्कि उसे उद्योग और समाज तक पहुंचाने में भी सफल हो रहा है।
Overall, विज्ञान टेक 2026 भारत के वैज्ञानिक सहयोग, स्टार्टअप संस्कृति और स्वदेशी नवाचार को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ है।
