भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। इसी कड़ी में नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh की सह-अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देने, मूल्यवर्धित उत्पादों के विकास, निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान वाणिज्य विभाग और मत्स्य विभाग की योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से निर्यात क्षमता बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया। विशेष रूप से अंतर्देशीय राज्यों में मीठे पानी की मछलियों के निर्यात को बढ़ाने, निर्यात अंतर को कम करने तथा मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीतियों पर जोर दिया गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानकों की स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस कदमों पर चर्चा हुई।
बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में देश का समुद्री खाद्य निर्यात बढ़कर ₹72,325.82 करोड़ (8.28 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मछुआरों, निर्यातकों, प्रसंस्करण उद्योग और सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने मत्स्य क्षेत्र में सतत विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अब भारत को केवल कच्चे उत्पादों के निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और विविधीकरण के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बनानी होगी। उन्होंने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए आधुनिक अवसंरचना विकसित करने, क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठनों (RFMO) में भारत की भागीदारी बढ़ाने और प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकार समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने के लिए ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्यवर्धन और प्रमाणन व्यवस्था को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे, ताकि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और निर्यात गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकें।
उन्होंने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के माध्यम से निर्यातकों की क्षमता निर्माण, कौशल विकास और बाजार तत्परता के लिए समयबद्ध कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने अंतर्देशीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रजातिवार निर्यात क्षमता का आकलन करने और निर्यात की संभावनाओं की पहचान करने पर जोर दिया।
बैठक में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की अपार संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में MPEDA तथा Export Inspection Council (EIC) की संस्थागत उपस्थिति बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि इन क्षेत्रों की समुद्री संपदा का बेहतर उपयोग किया जा सके।
मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए ट्रेसबिलिटी प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े 34 क्लस्टरों को अधिसूचित किया है, जिनका उद्देश्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाना है।
सरकार द्वारा किए गए हालिया प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 19.32 लाख मीट्रिक टन समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह 16.98 लाख मीट्रिक टन था। जमे हुए झींगे (Frozen Shrimp) निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बने रहे, जिनसे ₹47,973.13 करोड़ की आय हुई, जो कुल निर्यात आय का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा है।
सरकार ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क 2025 की शुरुआत, एंटीबायोटिक नियंत्रण को सख्त करना, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस को बढ़ावा देना तथा ईईजेड नियम एवं हाई सीज दिशानिर्देश 2025 लागू करना शामिल है।
बैठक के अंत में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समुद्री खाद्य निर्यात को और अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात रणनीति पर इसी तरह समन्वित प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।

