Climate Smart Farming: भारत में खेती तेजी से बदल रही है। जलवायु परिवर्तन, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बढ़ते मौसमीय जोखिमों के बीच अब किसानों के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी खेती की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे समय में BKC Weathersys किसानों तक मौसम आधारित सटीक जानकारी और आधुनिक कृषि सलाह पहुंचाने का काम कर रही है। इस कड़ी में फसल क्रांति की पत्रकार फिजा काज़मी ने बात की BKC Weathersys के डायरेक्टर डॉ. बी. के. सिंह से, पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश………….
सवाल 1: BKC किसानों के लिए कैसे कार्य कर रही है?
BKC Weathersys किसानों के लिए मौसम आधारित समाधान विकसित करने वाली एक महत्वपूर्ण कंपनी के रूप में काम कर रही है। हमारा मुख्य उद्देश्य किसानों तक सही समय पर सटीक मौसम जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे खेती से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकें। आज खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है और जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को अनिश्चित बारिश, तापमान में बदलाव, ओलावृष्टि और तेज हवाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान किसानों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
हम किसानों को स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। आधुनिक ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, डेटा एनालिटिक्स और एडवाइजरी सिस्टम के जरिए किसानों को यह बताया जाता है कि बुवाई, सिंचाई, खाद प्रबंधन और फसल सुरक्षा के लिए कौन सा समय सबसे उपयुक्त रहेगा। इससे किसानों की लागत कम होती है और उत्पादन बेहतर होता है।
हमारी कोशिश केवल मौसम बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि मौसम को खेती के फायदे में बदलना है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी क्षेत्र में बारिश की संभावना है तो किसान पहले से सिंचाई रोक सकता है। इसी तरह तेज हवा या रोग फैलने वाले मौसम की जानकारी मिलने पर किसान समय रहते फसल सुरक्षा के उपाय कर सकता है। इससे नुकसान कम होता है और आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
2. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को बचाने के लिए किसान किन बातों का ध्यान रखें?
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि आज किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए किसानों को पहले से अधिक सतर्क और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ना होगा। सबसे जरूरी बात यह है कि किसान नियमित रूप से मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें। यदि समय रहते बारिश या ओलावृष्टि की जानकारी मिल जाए, तो काफी हद तक फसल नुकसान को कम किया जा सकता है।
गेहूं, सरसों, फल और सब्जियों जैसी फसलों में जलभराव सबसे बड़ा खतरा बनता है। ऐसे में खेत में पानी निकासी की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है। किसान खेतों की मेड़ों और नालियों को पहले से तैयार रखें ताकि अतिरिक्त पानी जल्दी बाहर निकल सके। जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि की संभावना अधिक रहती है, वहां फल बागानों में एंटी-हेल नेट का उपयोग काफी लाभकारी साबित हो सकता है।
तेज बारिश और हवा के दौरान फसलों में रोग और फंगस का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार समय पर फफूंदनाशी और जैविक सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। आज मोबाइल आधारित मौसम जानकारी और रियल टाइम एडवाइजरी सिस्टम किसानों को सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं। किसानों को इन तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।
सवाल 3: किसानों के लिए फसल सलाह ऐप कैसे कार्य कर रहा है?
आज के दौर में खेती केवल अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि डेटा और तकनीक के आधार पर भी की जा रही है। फसल सलाह ऐप किसानों के लिए एक डिजिटल साथी की तरह काम कर रहा है, जो उन्हें समय-समय पर खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है।
BKC Weathersys द्वारा विकसित फसल सलाह प्रणाली किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, सिंचाई प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, खाद प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां मोबाइल के माध्यम से उपलब्ध कराती है। यह ऐप क्षेत्र विशेष के मौसम डेटा और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर काम करता है।
यदि किसी क्षेत्र में बारिश की संभावना होती है तो ऐप किसानों को पहले से अलर्ट देता है, जिससे किसान सिंचाई रोक सकते हैं या फसल कटाई का समय बदल सकते हैं। इसी तरह तापमान और नमी के आधार पर रोग फैलने की संभावना होने पर किसानों को पहले ही सावधान कर दिया जाता है। इससे फसल नुकसान कम होता है और लागत में भी बचत होती है।
सवाल 4: Weather Forecast को लेकर क्या बड़े बदलाव आए हैं?
पिछले कुछ वर्षों में weather forecast तकनीक में बहुत बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पहले मौसम पूर्वानुमान केवल सामान्य जानकारी तक सीमित रहता था, लेकिन अब तकनीक की मदद से यह काफी अधिक सटीक, तेज और क्षेत्र विशेष आधारित हो गया है। आज किसान गांव और खेत स्तर तक मौसम की जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं।
अब Artificial Intelligence, मशीन लर्निंग, सैटेलाइट डेटा और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन की मदद से मौसम का विश्लेषण पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर तरीके से किया जा रहा है। इससे बारिश, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान अधिक सटीक हो पाया है।
सबसे बड़ा बदलाव hyper-local forecasting में आया है। पहले एक पूरे जिले के लिए एक जैसा मौसम पूर्वानुमान जारी होता था, लेकिन अब अलग-अलग ब्लॉक और गांव स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मोबाइल ऐप, SMS अलर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भी weather forecast को किसानों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
सवाल 5: फसल क्रांति के माध्यम से आप किसान भाईयों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं फसल क्रांति के माध्यम से देश के किसान भाईयों को यही संदेश देना चाहूंगा कि आज खेती तेजी से बदल रही है और समय के साथ किसानों को भी नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। खेती केवल मेहनत का काम नहीं रह गया है, बल्कि अब यह जानकारी, तकनीक और सही निर्णय पर आधारित व्यवसाय बनती जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान मौसम की जानकारी, मिट्टी की जांच, जल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करें। बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के दौर में वैज्ञानिक खेती ही किसानों को सुरक्षित और लाभकारी बना सकती है।
मैं किसानों से यह भी कहना चाहूंगा कि वे डिजिटल तकनीकों से जुड़ें। मोबाइल ऐप, मौसम पूर्वानुमान सेवाएं, कृषि सलाह प्लेटफॉर्म और सरकारी योजनाओं की जानकारी आज खेती को नई दिशा दे रही हैं। आने वाला समय स्मार्ट और क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर का है, और भारत का किसान इस बदलाव का सबसे मजबूत हिस्सा बन सकता है।

