राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (नेशनल जूलॉजिकल पार्क) ने मिशन लाइफ अभियान के तहत बुधवार को ग्रीष्मकालीन अवकाश कार्यक्रम (Summer Vacation Programme – SVP) 2026 का भव्य शुभारंभ किया। दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न स्कूलों से आए छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ चिड़ियाघर के शिक्षा केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाना है।
यह कार्यक्रम विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।” के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को प्रकृति और वन्यजीवों के महत्व से जोड़ते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मिशन लाइफ अभियान के तहत विशेष पहल
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment) अभियान का हिस्सा है। मिशन लाइफ का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसी दिशा में बच्चों और किशोरों को जागरूक करने के लिए यह विशेष ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम के तहत छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किए जा रहे हैं। वन्यजीवों के व्यवहार, जैव विविधता, स्वच्छता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों को रोचक और संवादात्मक तरीके से समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
बड़ी संख्या में छात्रों ने कराया पंजीकरण
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध गूगल रजिस्ट्रेशन लिंक के माध्यम से कुल 854 छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। इनमें से “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर प्रतिभागियों का चयन किया गया।
उद्घाटन दिवस पर दिल्ली-एनसीआर के 15 स्कूलों के 39 छात्रों ने कार्यक्रम में भाग लिया। बच्चों में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। चयनित छात्रों से फोन के माध्यम से संपर्क कर उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई।
आयोजकों के अनुसार, छात्रों की भारी रुचि यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों को लेकर गंभीर और जागरूक हो रही है।
ओरिएंटेशन सत्र से हुई शुरुआत
कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभागियों के लिए विशेष ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें एसवीपी 2026 के उद्देश्यों, गतिविधियों और कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी गई।
इसके बाद छात्रों को चिड़ियाघर के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने शाकाहारी और मांसाहारी जीवों के बाड़ों का अवलोकन किया और वन्यजीवों के व्यवहार तथा उनके संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
छात्रों को यह भी बताया गया कि चिड़ियाघर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान और जन-जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं।
जैव विविधता पर विशेषज्ञ व्याख्यान
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम में जैव विविधता विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में डॉ. फैयाज ए. ने छात्रों को जैव विविधता के महत्व, पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीव संरक्षण की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर मौजूद हर जीव पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है तो इसका प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है।
डॉ. फैयाज ने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के छोटे-छोटे उपाय अपनाने की भी सलाह दी, जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, पेड़ लगाना और स्वच्छता बनाए रखना।
दो सप्ताह तक चलेगा कार्यक्रम
ग्रीष्मकालीन अवकाश कार्यक्रम 21 मई से 6 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम दो स्लॉट – स्लॉट ए और स्लॉट बी – में विभाजित है। प्रत्येक स्लॉट में 50 प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, जिनमें 25 जूनियर और 25 सीनियर छात्र शामिल हैं।
कार्यक्रम विशेष रूप से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उन्हें व्यावहारिक शिक्षण और संरक्षण शिक्षा से जोड़ा जा सके।
आयोजकों का कहना है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यही बच्चे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
रचनात्मक गतिविधियों से सीखेंगे छात्र
कार्यक्रम की रूपरेखा को रोचक और संवादात्मक बनाया गया है। इसमें छात्रों के लिए कई शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
इन गतिविधियों में वन्यजीव फोटोग्राफी, पोस्टर निर्माण, स्लोगन लेखन, निबंध लेखन, आर्ट एंड क्राफ्ट, क्ले मॉडलिंग, प्रदर्शनी, धरोहर यात्रा (हेरिटेज वॉक), स्वच्छता जागरूकता अभियान और विशेषज्ञ वार्ताएं शामिल हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनमें प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चों को व्यवहारिक तरीके से सीखने का अवसर मिलता है, तो वे विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से समझते हैं और उन्हें लंबे समय तक याद रखते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता जरूरी
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संवादात्मक और नवाचार आधारित शैक्षणिक पहलें युवाओं को आधुनिक तकनीकों और संरक्षण शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. संजीत कुमार के अनुसार, यदि बच्चों को प्रारंभ से ही पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए, तो भविष्य में वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम होंगे।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
प्रकृति से जुड़ने का अवसर
ग्रीष्मकालीन अवकाश कार्यक्रम 2026 छात्रों के लिए केवल छुट्टियों का एक साधारण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति को करीब से समझने और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को महसूस करने का अवसर बनकर सामने आया है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चे न केवल वन्यजीवों और जैव विविधता के बारे में सीख रहे हैं, बल्कि वे यह भी समझ रहे हैं कि पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान की यह पहल आने वाली पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


